कैश कांड मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बनाई गई समिति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत ने साफ कर दिया कि इस स्तर पर वह जांच प्रक्रिया में दखल नहीं देगी।
किस समिति को दी गई थी चुनौती
जस्टिस वर्मा ने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी। यह समिति उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए बनाई गई है। जस्टिस वर्मा का कहना था कि समिति का गठन कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुआ है, इसलिए यह समिति जांच नहीं कर सकती।
पिछली सुनवाई में क्या कहा था कोर्ट ने
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि समिति के गठन में प्रक्रिया से जुड़ी कुछ कमियां हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या ये कमियां इतनी गंभीर हैं कि अदालत को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। इसी के साथ जस्टिस वर्मा को समिति के सामने पेश होने का निर्देश भी दिया गया था।
याचिका खारिज करने की वजह
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जस्टिस वर्मा ने राज्यसभा के उपसभापति के स्तर पर लिए गए फैसले को चुनौती नहीं दी। अदालत ने यह भी कहा कि जब लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति दोनों ने प्रस्ताव को एक साथ आगे नहीं बढ़ाया, तो संयुक्त समिति का गठन संभव नहीं था। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।
जस्टिस वर्मा की आपत्ति क्या थी
जस्टिस वर्मा का तर्क था कि न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों में महाभियोग से जुड़े नोटिस दिए गए थे, इसके बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ने राज्यसभा सभापति से सलाह किए बिना समिति बना दी, जो नियमों के खिलाफ है।
आगे क्या होगा
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जांच समिति का रास्ता साफ हो गया है। समिति जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी रखेगी। इस मामले पर देश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह न्यायपालिका से जुड़े बड़े और संवेदनशील मामलों में से एक माना जा रहा है।