Instructors Jobs Will Not Terminated: उत्तर प्रदेश के करीब 25 हजार अंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है, जिसके बाद शिक्षकों की नौकरी तो सुरक्षित हुई ही है, साथ ही मानदेय 17 हजार रुपये प्रतिमाह तय हो गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने सुनाई है।
यूपी सरकार की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए यूपी सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि संविदा की तय अवधि पूरी हो जाने के बावजूद अनुदेशकों की नियुक्ति को केवल संविदात्मक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने माना कि सालों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे इन अनुदेशकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट का ये फैसला हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर लेकर आई है।
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6 महीने के अंदर बकाया चुकाया जाए
भुगतान कब से और बकाया कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाए। साथ ही 4 फरवरी 2026 से छह महीने के भीतर पूरा बकाया भी चुकाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले से साल 2013 से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे अंशकालिक शिक्षकों को सीधी और बड़ी राहत मिली है।
मानदेय लागू नहीं हुआ था
बता दें कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में अनुदेशकों का मानदेय 2017 में 8,470 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद फैसला न लागू होने पर इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपये मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया। राज्य सरकार ने अपील की थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिर्फ एक साल के लिए 17,000 रुपये का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।