Himanta Biswa Sarma Case: सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि शीर्ष अदालत किसी भी विवाद को निपटाने का “प्लेग्राउंड” नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। याचिका में मुख्यमंत्री पर कथित आपत्तिजनक बयानों को लेकर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी।
संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संविधान के तहत हाईकोर्ट को ऐसे मामलों में उचित आदेश देने का अधिकार है। इसलिए याचिकाकर्ता को पहले वहीं जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो बाद में मामले पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने संबंधित हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई प्राथमिकता से करने का अनुरोध किया।
एफआईआर की मांग
याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए कुछ बयान और सोशल मीडिया पर साझा सामग्री आपत्तिजनक है। इन याचिकाओं में एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की गई थी। यह याचिका कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़ी नेता एनी राजा की ओर से दायर की गई थी।
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सोशल मीडिया पर बहस
इस मामले में एक पोस्टर और वीडियो भी चर्चा में रहे, जिनमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री से मिलता-जुलता किरदार दिखाया गया था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। बाद में संबंधित सामग्री हटाए जाने की जानकारी सामने आई।
हाईकोर्ट में सुनवाई
अब इस पूरे प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित हाईकोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद स्पष्ट है कि फिलहाल शीर्ष अदालत सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निचली अदालतों में ही मामला आगे बढ़ेगा।