सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस प्रक्रिया को लेकर ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे देश में पहली बार वोटर लिस्ट का रिवीजन किया जा रहा हो। अदालत ने कहा कि यदि प्रक्रिया में कोई बड़ी गड़बड़ी है तो चुनाव आयोग को इसका जवाब देना होगा।
हर कोई यथास्थिति बनाए रखना चाहता है
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग द्वारा तय की गई समयसीमा बेहद अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि लाखों फॉर्म को इतने कम समय में डिजिटाइज करना संभव नहीं है और इस वजह से पूरी प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी। सिब्बल ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप लोगों को इस प्रक्रिया से इतनी चिंता क्यों है? अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम SIR को ही रद्द कर देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर कोई यथास्थिति बनाए रखना चाहता है, जबकि सुधार की प्रक्रिया लोकतंत्र का हिस्सा है।
चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सिब्बल ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में हालात और भी मुश्किल हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है — न 5G है, न 4G, और कुछ इलाकों में तो इंटरनेट ही नहीं है। ऐसे में इतने कम समय में डिजिटलीकरण संभव नहीं है। अदालत ने इस पर कहा कि आयोग को इन चिंताओं पर ठोस जवाब देना होगा और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट अब चुनाव आयोग के जवाब के बाद अगली सुनवाई में तय करेगा कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया में किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं।