Suresh Raina Retirement : 15 अगस्त 2020 भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे भावुक तारीखों में से एक रही। इसी दिन एमएस धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद सुरेश रैना ने भी संन्यास का ऐलान कर सभी को हैरान कर दिया। टीम इंडिया और चेन्नई सुपर किंग्स में लंबे समय तक साथ खेलने वाले धोनी और रैना की दोस्ती पहले से ही मिसाल मानी जाती रही है।
रैना ने किया बड़ा खुलासा
करीब छह साल बाद सुरेश रैना ने उस पल को याद करते हुए बताया कि उनके संन्यास की खबर सुनकर धोनी का पहला रिएक्शन क्या था। आकाश चोपड़ा के साथ बातचीत में रैना ने कहा कि उन्हें उस समय लगा कि यही सही वक्त है जब वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने का फैसला किया।
ड्रेसिंग रूम में हुई थी बातचीत
रैना ने बताया कि धोनी के संन्यास की घोषणा के बाद वह ड्रेसिंग रूम में पहुंचे और कहा कि अब सब खत्म हो गया। रैना के मुताबिक, उनकी बात सुनकर धोनी हैरान रह गए। माही ने तुरंत पूछा, “ये क्या किया तूने?” रैना ने बताया कि धोनी को उम्मीद नहीं थी कि वह भी उसी दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे।
परिवार और भविष्य को दी प्राथमिकता
रैना का कहना है कि एक खिलाड़ी अपने देश के लिए पूरी जिंदगी मेहनत करता है। इसके पीछे परिवार और माता-पिता का भी बड़ा त्याग होता है। लेकिन एक समय ऐसा आता है जब खिलाड़ी अपने परिवार के साथ समय बिताने को प्राथमिकता देना चाहता है। रैना ने माना कि उस समय उन्हें लगा कि आगे बढ़ने और नई जिंदगी शुरू करने का यही सही अवसर है।
धोनी ने किया था बड़ा त्याग
बातचीत के दौरान रैना ने अपनी सफलता का श्रेय भी एमएस धोनी को दिया। उन्होंने बताया कि कप्तान बनने के बाद धोनी ने अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया ताकि टीम को संतुलन मिल सके। रैना के अनुसार, धोनी पहले ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद नीचे बल्लेबाजी करना स्वीकार किया और दूसरे खिलाड़ियों को ऊपर खेलने का मौका दिया।
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आज भी कायम है वही रिश्ता
धोनी और रैना की दोस्ती आज भी क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय रहती है। दोनों जब भी किसी कार्यक्रम या मंच पर साथ दिखाई देते हैं तो प्रशंसक उन्हें उसी पुराने अंदाज में देखकर खुश हो जाते हैं। 15 अगस्त 2020 का वह दिन सिर्फ दो दिग्गज खिलाड़ियों के संन्यास का दिन नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट की एक यादगार साझेदारी के अंतरराष्ट्रीय अध्याय का भी अंत था।