17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है, जिसे खगोल विज्ञान में एनुलर यानी वलयाकार ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान सूर्य एक चमकदार रिंग जैसा दिखाई देता है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। मध्यप्रदेश के लोगों में सवाल है कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में इसकी टाइमिंग क्या रहेगी और क्या सूतक काल मान्य होगा? आइए विस्तार से समझते हैं।
कब शुरू और कब खत्म होगा ग्रहण?
पंचांग के अनुसार 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण शाम लगभग 5:26 बजे शुरू होकर 7:57 बजे तक रहेगा। अधिकतम अवस्था में करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक ‘रिंग ऑफ फायर’ का नज़ारा दिखेगा। यह एक एनुलर ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और किनारों पर अग्नि-वलय जैसी चमक दिखाई देती है।
क्या MP में दिखेगा सूर्य ग्रहण?
भोपाल, इंदौर, उज्जैन या मध्यप्रदेश के किसी भी शहर में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणनाओं के मुताबिक इसकी दृश्यता मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर के आसपास और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों—खासकर अर्जेंटीना क्षेत्र—तक सीमित रहेगी। एशिया और यूरोप के अधिकांश हिस्सों में यह नजर नहीं आएगा।
सूतक काल लगेगा या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक तभी प्रभावी माना जाता है जब उसकी छाया भारत पर पड़े। चूंकि 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। मंदिरों के कपाट बंद करने या विशेष नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं मानी जाएगी।
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व
हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान और दान शुभ माना जाता है। हालांकि ज्योतिषीय गणना कहती है कि असर केवल उसी स्थान पर होता है जहां ग्रहण की छाया पड़ती है। इसलिए मध्यप्रदेश सहित भारत पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या है एनुलर ग्रहण की खासियत?
एनुलर सूर्य ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है, जिससे वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप सूर्य के किनारे एक चमकदार अग्नि-वलय बनता है। यही कारण है कि इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह दृश्य खगोल प्रेमियों के लिए बेहद आकर्षक होता है, लेकिन इस बार इसका नज़ारा भारत में उपलब्ध नहीं होगा।