शांत दिखाई देने वाला सूर्य इन दिनों बेहद उग्र रूप में नजर आ रहा है। सूर्य की सतह पर हुए एक शक्तिशाली सौर विस्फोट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि सूर्य से निकला एक विशाल चुंबकीय तूफान तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में भारी हलचल पैदा हो सकती है। अंतरिक्ष मौसम विभाग ने इसे G3 श्रेणी का जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म घोषित किया है।
1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ रहा फिलामेंट
वैज्ञानिकों के मुताबिक 6 जून को सूर्य के ‘एक्टिव रीजन 4461’ में M1.8 श्रेणी का शक्तिशाली सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया। इस विस्फोट के साथ सूर्य से एक बेहद घना और शक्तिशाली चुंबकीय फिलामेंट निकला है, जो लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने इसे "टेक्स्टबुक कोर फिलामेंट इरप्शन" बताया है, जो सीधे पृथ्वी के अंतरिक्षीय वातावरण को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
S-शेप चुंबकीय संरचना बनी विस्फोट की वजह
NASA के वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य के जिस हिस्से से यह विस्फोट हुआ, वहां चुंबकीय रेखाएं अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर की तरह उलझी हुई थीं। इन रेखाओं में अत्यधिक ऊर्जा जमा हो गई थी। जैसे ही यह दबाव अपनी सीमा पर पहुंचा, चुंबकीय रेखाएं टूटकर दोबारा जुड़ गईं और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त हुई। इसके चलते शक्तिशाली एक्स-रे विकिरण भी निकला, जिससे पृथ्वी पर कुछ समय के लिए रेडियो संचार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
क्या होता है फिलामेंट और क्यों माना जाता है खतरनाक?
फिलामेंट सूर्य के कोरोना में मौजूद अपेक्षाकृत ठंडी लेकिन बेहद घनी प्लाज्मा गैस का विशाल गुच्छा होता है। जब इसे थामे रखने वाला चुंबकीय क्षेत्र अस्थिर हो जाता है, तो यह अचानक अंतरिक्ष में फट पड़ता है। ऐसे विस्फोट करोड़ों टन सौर पदार्थ को अंतरिक्ष में फेंक सकते हैं, जो पृथ्वी तक पहुंचकर उपग्रहों, संचार नेटवर्क और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत में भी दिख सकता है ऑरोरा का दुर्लभ नजारा
इस सौर तूफान का एक रोमांचक पहलू भी है। जब सूर्य से आने वाले चार्ज्ड कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैसों से टकराते हैं, तो आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की चमकदार रोशनी दिखाई देती है, जिसे ऑरोरा कहा जाता है। आमतौर पर यह नजारा ध्रुवीय देशों में ही दिखता है, लेकिन G3 श्रेणी के शक्तिशाली तूफान के कारण इसका दायरा दक्षिण की ओर खिसक सकता है। मौसम साफ रहने पर लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में सोमवार और मंगलवार की रात इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखा जा सकता है।