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Sushila Karki: नेपाल में तेज राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नामित कर दिया गया है। केपी शर्मा ओली के इस्तीफे और बाद के हिंसक प्रदर्शन के बीच राजनीतिक दलों और Gen-Z आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है, जिसके बाद कार्की को सरकार बनाने का दायित्व सौंपा गया। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह रात 9 बजे आयोजित होगा। स्थिति पर काबू पाने और प्रशासनिक कामकाज सुचारू रखने के लिए अंतरिम सरकार जल्द ही संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप कदम उठाएगी।
सुशीला कार्की का करियर न्यायिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि से सधा हुआ रहा है। वे 7 जून 1952 को बिराटनगर में जन्मीं; बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में परास्नातक और त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री ग्रहण की। 1979 में वकालत की शुरुआत के बाद न्यायिक मार्ग पर उनका उठाव 2009 में सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी न्यायाधीश बनने के साथ तेज हुआ। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं, हालांकि उस समय संसद में उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव आया था। विवाद के बावजूद सार्वजनिक समर्थन और न्यायिक स्वतंत्रता की होड़ में उन्होंने अपनी छवि मजबूत की।
हालिया घटनाक्रम में Gen-Z आंदोलन की भूमिका निर्णायक रही। आंदोलन के कुछ नेताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ राजनीतिक वार्ता के बाद ही कार्की के नाम पर सर्वसम्मति बनी। हालांकि आंदोलन से जुड़ा एक वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें चेतावनी भरे बयानों का उल्लेख है — इस तरह के कड़े बयान राजनीतिक माहौल को संवेदनशील बना देते हैं और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ाते हैं। अब अंतरिम सरकार के प्रमुख कार्यों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, प्रदर्शनकारियों की शर्तों का पालन कराना और शीघ्र चुनाव की राह साफ करना शामिल होगा।
शपथ और आगे की प्राथमिकताएँ
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा घोषित समयानुसार रात 9 बजे शपथ के बाद कार्की को अस्थायी शासन-व्यवस्था को स्थिर करना होगा, कानून-व्यवस्था की बहाली और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन प्राथमिकता बनेगा।
राजनीतिक माहौल और चुनौती
Gen-Z के समर्थन वाली सहमति सहज नहीं मानी जा सकती; समाज में शांति लौटाने, प्रदर्शनकारियों की मांगों और राजनीतिक दलों के संतुलन को साधना मुख्य चुनौती रहेगी।