Jadavpur University: पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर बीजेपी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विश्वविद्यालय में कथित राजनीतिक दबाव, छात्रों से जुड़े विवाद और विचारधारा की राजनीति को लेकर कई आरोप लगाए। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जादवपुर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी विचार रखने वाले छात्र पढ़ते हैं, लेकिन उन पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, उनके इन आरोपों पर विश्वविद्यालय या राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है।
छात्रों पर दबाव का लगाया आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने परिसर में रैगिंग और छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। शुभेंदु ने दावा किया कि रैगिंग के नाम पर एक छात्र की मौत हुई थी और विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ भी कथित तौर पर हमला किया गया। उन्होंने इन घटनाओं को लेकर व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
‘लेनिन नगर’ बनाने की कोशिश का दावा
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि जादवपुर विश्वविद्यालय को लंबे समय से एक खास राजनीतिक विचारधारा का गढ़ बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ‘लेनिन नगर’ बनाने की कोशिशों को खत्म किया जा चुका है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में राष्ट्रवादी और गेरुआ विचारधारा को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
आजादी के नारों पर उठाए सवाल
शुभेंदु अधिकारी ने विश्वविद्यालय में लगाए जाने वाले आजादी के नारों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे किस तरह की आजादी की बात करते हैं। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मास्टरदा सूर्य सेन का उल्लेख किया। उन्होंने छात्रों से इन स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और उनके संघर्ष से सीख लेने की बात कही।
जादवपुर में राजनीतिक वर्चस्व खत्म करने का दावा
शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग को भी अपने निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) से जुड़े मामलों की जांच की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह नंदीग्राम में वामपंथी प्रभाव को चुनौती दी गई और जंगलमहल में किशनजी के प्रभाव को खत्म किया गया, उसी तरह जादवपुर विश्वविद्यालय में भी राजनीतिक वर्चस्व समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में राष्ट्रवाद और गेरुआ विचारधारा को लेकर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।