प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में हुई गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने उनकी संस्था को दूसरा नोटिस भेजा है, जिसमें भूमि आवंटन रद्द करने और भविष्य में मेले से प्रतिबंधित करने तक की चेतावनी दी गई है। 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है।
मौनी अमावस्या की घटना से उपजा विवाद
मेला प्राधिकरण का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी और सुरक्षा के लिहाज से किसी भी प्रकार के वाहन ले जाने पर रोक लगाई गई थी। इसी दौरान शंकराचार्य की ओर से बग्घी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया गया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी। प्रशासन का दावा है कि इससे व्यवस्था प्रभावित हुई और श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
दूसरे नोटिस में क्या-क्या आरोप
दूसरे नोटिस में संस्था के नाम आवंटित भूमि और सुविधाएं निरस्त करने की बात कही गई है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्यों न उन्हें आजीवन माघ मेले से प्रतिबंधित किया जाए। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि शिविर में लगाए गए कुछ बोर्ड कानूनी निर्देशों के खिलाफ हो सकते हैं, जिसे गंभीर माना जा रहा है।
24 घंटे में जवाब देने का निर्देश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले पर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। नोटिस में यह भी जोड़ा गया है कि भीड़ प्रबंधन के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तय है।
शिष्यों और मीडिया प्रभारी का पलटवार
शंकराचार्य के शिष्यों के अनुसार नोटिस देर रात शिविर के बाहर चस्पा किया गया, जबकि उस पर पहले की तारीख दर्ज है। मीडिया प्रभारी की ओर से जारी बयान में इसे बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया गया है। उन्होंने कहा कि जिस वाहन को बग्घी बताया जा रहा है, वैसा कोई साधन शिविर में मौजूद ही नहीं था और सीसीटीवी फुटेज से यह साफ हो सकता है।
आगे क्या होगा, सबकी निगाहें जवाब पर
मामले ने अब प्रशासनिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। एक ओर प्रशासन नियमों के पालन पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य पक्ष आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 24 घंटे के भीतर दिया जाने वाला जवाब क्या मोड़ लेता है और क्या वास्तव में भूमि आवंटन रद्द करने जैसी कार्रवाई होती है।