उत्तर प्रदेश सरकार अब ग्रामीण सफाई कर्मियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है. पंचायतीराज विभाग 16 साल बाद सेवा नियमावली तैयार कर रहा है, जिससे राज्य के करीब एक लाख सफाई कर्मचारियों को राहत मिलेगी. सेवा नियमावली न होने के कारण अब तक इन कर्मियों को तबादला, पदोन्नति और सेवा से जुड़ी अन्य सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं.
कमेटी का गठन, 15 दिन में शासन को रिपोर्ट
कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को देखते हुए विभाग ने संयुक्त निदेशक (प्रशासन) एसएन सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी 15 दिनों के भीतर सेवा नियमावली का प्रारूप तैयार कर शासन को सौंपेगी. इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
2008 में हुई थी भर्ती, अब मिलेगा नियमों का सहारा
वर्ष 2008 में करीब 1.08 लाख ग्रामीण सफाई कर्मियों की भर्ती हुई थी. तब से अब तक कोई सेवा नियमावली नहीं बनी, जिससे कर्मचारियों में असंतोष था. इस नई व्यवस्था से सेवा की शर्तें, अवकाश नियम, आचार संहिता और अनुशासन की प्रक्रिया भी स्पष्ट होगी.
कर्मचारियों को मिलेगा अपनी बात रखने का अवसर
अब कोई भी कार्रवाई नियमों के तहत होगी, जिससे कर्मचारियों को मनमानी कार्रवाई का डर नहीं रहेगा. उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा. ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री रामेंद्र श्रीवास्तव ने इसे ऐतिहासिक राहत बताया है.