आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खतरे के निशान से ढाई फीट ऊपर बह रही यमुना अब ताजमहल की पिछली दीवार तक पहुंच गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग का कहना है कि ताजमहल की नींव सुरक्षित है, लेकिन बढ़ते पानी से संरक्षित स्मारकों में सीलन का खतरा बढ़ गया है। यदि जलस्तर और ऊपर गया तो शहर के निचले इलाकों के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
ताजमहल और स्मारकों पर खतरा
यमुना की तेज धारा ताजमहल की पिछली दीवार से टकरा रही है। आगरा किला की खाई में पानी भर गया है जबकि एत्माउद्दौला के पीछे बने 12 कमरे पानी में डूब चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल की नींव पानी में बनी लकड़ी पर टिकी है जो खराब नहीं होती, फिर भी निरीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
बढ़ता जलस्तर और बाढ़ का खतरा
पिछले 24 घंटों में यमुना का जलस्तर बढ़कर 497.5 फीट तक पहुंच गया है। चेतावनी स्तर 495 फीट है और अनुमान है कि रविवार तक जलस्तर 499 फीट तक जा सकता है। 1978 में बाढ़ के समय यह स्तर 508 फीट तक पहुंचा था। इस बार भी अगर बारिश और बैराज से छोड़े जा रहे पानी की रफ्तार बनी रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
शहर और ग्रामीण इलाकों की स्थिति
दयालबाग, सिकंदरपुर रोड, टेढ़ी बगिया और निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित होना पड़ा है। पोइया और ताजगंज स्थित मोक्षधाम डूब गए, जिससे अंतिम संस्कार में दिक्कत हुई। वहीं, एत्मादपुर, सदर, फतेहाबाद और बाह तहसील के 40 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आने की आशंका में हैं।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
हथिनीकुंड बैराज: 1,42,604 क्यूसेक
ओखला बैराज: 2,40,002 क्यूसेक
गोकुल बैराज: 1,07,944 क्यूसेक