अफगानिस्तान में महिलाओं की ज़िंदगी तालिबानी नियमों की कैद में है। एक ओर उन्हें शिक्षा, रोजगार, जिम और कॉलेज जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बोटॉक्स और फेसलिफ्ट जैसी कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की अनुमति है। तालिबान महिलाओं को घर से बाहर निकलने, स्वतंत्र रूप से जीने और संकट में राहत पाने से रोकता है, लेकिन उनकी खूबसूरती पर नियंत्रण रखने के लिए विदेशी ब्यूटी एक्सपर्ट्स तक बुला रहा है। यह तालिबानी मानसिकता का असली दोहरापन है।
कॉस्मेटिक सर्जरी को मिली छूट
अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से लगभग हटा दिया गया है, लेकिन कॉस्मेटिक सर्जरी पर कोई रोक नहीं है। बोटॉक्स, फेसलिफ्ट और लिप फिलर जैसी प्रक्रियाएं जारी हैं। तालिबान ने तुर्की जैसे देशों से ब्यूटी एक्सपर्ट्स बुलाए हैं और कुछ अफगान डॉक्टर भी लौटकर इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं रोकी जा सकती हैं, तो सौंदर्य उपचार क्यों नहीं?
खूबसूरती के नाम पर अपवाद
तालिबान ने महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा को महत्वहीन बना दिया है, लेकिन "खूबसूरत दिखने" के लिए धार्मिक नियमों में ढील दी जा रही है। हाल ही में आए भूकंप में महिलाओं की जान इसलिए गई क्योंकि पुरुष बचावकर्मी उन्हें छू नहीं सकते थे। यानी जान बचाना पाप है, लेकिन सौंदर्य की खातिर नियमों को तोड़ना जायज़।
सजने की छूट, जीने की मनाही
अफगान महिलाएं आज एक ऐसे समाज में जी रही हैं जहां उनका रूप-रंग सत्ता की नज़र में अहम है, लेकिन उनकी जान और स्वतंत्रता की कोई कीमत नहीं। वे काम नहीं कर सकतीं, अकेले यात्रा नहीं कर सकतीं, सार्वजनिक रूप से एक्सरसाइज नहीं कर सकतीं। उनका जीवन नियंत्रित है, लेकिन चेहरा सजाया जा सकता है।
कड़वा सच
आधुनिक अफगानिस्तान में महिलाओं को सजना-संवरना तो मंज़ूर है, मगर सुरक्षित जीवन और स्वतंत्रता अपराध मानी जाती है। यह विडंबना है कि यहां बोटॉक्स लेना आसान है, लेकिन भूकंप से बचना मुश्किल। महिलाओं की सुंदरता राजनीति का हिस्सा है, लेकिन उनका अस्तित्व हाशिये पर।