Tamil Nadu Fireworks Business 2026 : तमिलनाडु में दिवाली सिर्फ रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपये के कारोबार का भी बड़ा मौका है। इस बार पटाखों की बिक्री से राज्य में 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद जताई जा रही है। थलपति विजय की सरकार के लिए भी यह दिवाली आर्थिक लिहाज से अहम हो सकती है। तमिलनाडु पहले से कर्ज के बोझ से जूझ रहा है और ऐसे में राज्य के बड़े उद्योगों से होने वाली कमाई पर नजर रहेगी। हालांकि, पटाखों की बिक्री से होने वाला पूरा कारोबार सरकारी खजाने में नहीं जाता, लेकिन इससे जुड़े कारोबार और करों के जरिए राज्य की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता है।
शिवकाशी है पटाखा उद्योग का गढ़
तमिलनाडु का शिवकाशी शहर देश में पटाखा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। देश में बिकने वाले पटाखों का करीब 90 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा बताया जाता है। दिवाली के दौरान यहां की फैक्ट्रियों में कामकाज तेज हो जाता है, क्योंकि यही पटाखा कारोबार का सबसे व्यस्त समय होता है। इस उद्योग से करीब आठ लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। पटाखे बनाने से लेकर पैकिंग, ढुलाई और बिक्री तक कई तरह के काम होते हैं। ऐसे में दिवाली के मौसम में होने वाला कारोबार स्थानीय रोजगार और व्यापार के लिए बेहद अहम है।
7000 करोड़ से 8000 करोड़ का लक्ष्य
पटाखा उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में तमिलनाडु के पटाखा कारोबार का टर्नओवर करीब 7000 करोड़ रुपये रहा था। इससे पहले 2024 में यह लगभग 6000 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में करीब 1000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। फायरवर्क्स ट्रेडर्स फेडरेशन के अनुमान के आधार पर अगर इस बार भी कारोबार में इतनी ही बढ़त होती है, तो टर्नओवर 8000 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक अनुमान है। वास्तविक बिक्री का आंकड़ा बाजार की मांग, उत्पादन और नियमों पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर
पटाखों की बिक्री पर दिल्ली-एनसीआर में लागू नियमों का असर शिवकाशी के कारोबार पर भी पड़ता है। यहां पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंधों के कारण ग्रीन पटाखों की अनुमति और समय सीमा जैसे मुद्दे अहम रहते हैं। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित समय के लिए पटाखे जलाने की अनुमति दी थी। इससे बिक्री को कुछ सहारा मिलने की बात कही गई थी। इस साल पटाखे जलाने की अनुमति को लेकर अदालत के आदेश और स्थानीय नियम कारोबार की दिशा तय कर सकते हैं। हालांकि, बिक्री पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह पहले से तय नहीं कहा जा सकता।
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उत्पादन में 25 फीसदी की गिरावट
बाजार में मांग की उम्मीद के बावजूद शिवकाशी के पटाखा निर्माताओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, मजदूरों की कमी और सरकारी नियमों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार पटाखों का उत्पादन करीब 25 फीसदी घटा है। अगर उत्पादन में कमी बनी रहती है, तो त्योहार के दौरान मांग पूरी करना मुश्किल हो सकता है। इससे कारोबार के अनुमान पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में उद्योग की नजर उत्पादन, मजदूरों की उपलब्धता और बाजार में पटाखों की मांग पर टिकी है।
विजय सरकार के लिए कितना फायदा?
तमिलनाडु में पटाखों का कारोबार बढ़ना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर हो सकती है। इससे कारोबारियों, दुकानदारों, परिवहन और इससे जुड़े श्रमिकों को फायदा मिल सकता है। सरकार को भी करों और आर्थिक गतिविधियों के जरिए लाभ मिलने की संभावना रहती है। लेकिन 8000 करोड़ रुपये का पूरा टर्नओवर सरकारी खजाने में जमा नहीं होगा। इस बार उत्पादन में कमी और पटाखों से जुड़े नियम कारोबार की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए थलपति विजय सरकार के लिए दिवाली कितनी आर्थिक राहत लेकर आएगी, इसका अंदाजा वास्तविक बिक्री और सरकारी राजस्व के आंकड़े सामने आने के बाद ही लगाया जा सकेगा।