तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक और संवैधानिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी एम. रामासुब्रमणि ने राज्यपाल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद टीवीके प्रमुख थलपति विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। याचिका में राज्यपाल के कदम को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
राज्यपाल के फैसले पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि तमिलगा वेत्री कषगम राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन इसके बावजूद पार्टी प्रमुख थलपति विजय को सरकार गठन का मौका नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह फैसला संवैधानिक परंपराओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने दाखिल की याचिका
यह याचिका सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम. रामासुब्रमणि ने दाखिल की है। उन्होंने पुलिस विभाग में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक जैसे अहम पदों पर सेवाएं दी हैं। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक घोषित किया जाए और सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाने का निर्देश दिया जाए।
विधानसभा के बाहर बहुमत साबित कराने का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्यपाल का रुख ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है, जिसमें बहुमत का परीक्षण विधानसभा के बजाय बाहर तय होता दिखाई दे रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह संविधान की मूल भावना और संसदीय लोकतंत्र की प्रक्रिया के खिलाफ माना जा सकता है।
बहुमत से 10 सीट दूर है टीवीके
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस के पांच विधायकों ने विजय को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके अलावा विजय ने सीपीआई सीपीएम और वीसीके जैसे दलों से भी संपर्क साधा है, जिनके पास दो-दो विधायक हैं।
तीन बार पेश किया सरकार बनाने का दावा
चुनाव नतीजों के बाद थलपति विजय अब तक तीन बार राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें आमंत्रण नहीं मिलने से राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हुई है।