तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्ता परिवर्तन के बाद अब टीवीके प्रमुख थलपति विजय मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। सरकार बदलने के साथ राजनीतिक रिश्ते भी बदलते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर विजय सरकार का समर्थन कर दिया है। वहीं अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या बीजेपी और डीएमके के बीच नई नजदीकियां बढ़ रही हैं।
डीएमके को लगा बड़ा झटका
कांग्रेस के अलग होने के बाद डीएमके को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इसके बाद डीएमके ने विपक्षी गठबंधन से दूरी बना ली। माना जा रहा है कि इस बदलाव के बाद पार्टी खुद को नए सियासी विकल्पों के लिए तैयार कर रही है। इसी बीच दिल्ली की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और बीजेपी ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
बीजेपी की नजर सांसदों पर
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की नजर डीएमके के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों पर है। संसद में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की रणनीति के तहत बीजेपी अलग-अलग दलों के समर्थन की संभावनाएं तलाश रही है। इसी वजह से डीएमके के सांसदों की संख्या को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में अब इस पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीधे गठबंधन से ज्यादा समर्थन की कोशिश
माना जा रहा है कि बीजेपी सीधे तौर पर गठबंधन करने के बजाय मुद्दों के आधार पर समर्थन का रास्ता तलाश रही है। पहले भी कई क्षेत्रीय दल इस तरह संसद में अलग-अलग मुद्दों पर समर्थन देते रहे हैं। यही वजह है कि पर्दे के पीछे बातचीत और राजनीतिक समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं।
दो-तिहाई बहुमत का बड़ा लक्ष्य
वन नेशन वन इलेक्शन, परिसीमन और कई बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए संसद में दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। ऐसे में बीजेपी के लिए हर अतिरिक्त संख्या अहम मानी जा रही है। डीएमके के सांसद अगर किसी रूप में समर्थन करते हैं तो कई बड़े विधेयकों का रास्ता आसान हो सकता है।
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अब सबकी नजर अगले कदम पर
फिलहाल राजनीति में कोई औपचारिक ऐलान सामने नहीं आया है, लेकिन बदलते घटनाक्रम ने तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि यह सिर्फ राजनीतिक चर्चा बनकर रह जाती है या आने वाले दिनों में नए गठबंधन की तस्वीर भी सामने आती है। सियासत में हालात कब बदल जाएं, यह कोई नहीं जानता।