तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता थलपति विजय ने अपनी पार्टी के साथ चुनावी मैदान में उतरकर नई सियासी लकीर खींच दी है। उनकी पार्टी ने पारंपरिक दलों डीएमके और एआईएडीएमके के सामने मजबूत चुनौती पेश की है। यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि लंबे समय की तैयारी का नतीजा माना जा रहा है।
फिल्मी करियर छोड़ राजनीति में दांव
विजय ने राजनीति में उतरने से पहले अपने फिल्मी करियर को लगभग विराम दे दिया था। यह कदम उन्हें अन्य सितारों से अलग बनाता है। रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज भी राजनीति में आए, लेकिन वे पूरी तरह सिनेमा से अलग नहीं हो पाए। विजय ने सीधे जनता के बीच जाकर खुद को एक गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।
युवाओं और महिलाओं पर फोकस
विजय की लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार युवा वर्ग माना जा रहा है। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में युवा जुटे और सोशल मीडिया पर भी उन्हें व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने महिलाओं के लिए भी कई वादे किए, जिससे उनका प्रभाव और बढ़ा। उनका प्रचार अभियान गांव-गांव तक पहुंचा और हर वर्ग को साधने की कोशिश की गई।
घोषणापत्र में बड़े वादे
विजय ने अपने चुनावी वादों में कई बड़े ऐलान किए। इनमें हर परिवार को 25 लाख तक स्वास्थ्य बीमा, महिलाओं को मासिक सहायता, मुफ्त गैस सिलेंडर, मुफ्त बस यात्रा, युवाओं के लिए रोजगार और इंटर्नशिप जैसी योजनाएं शामिल रहीं। इसके अलावा किसानों के लिए कर्ज माफी और स्टार्टअप के लिए ब्याज मुक्त लोन का वादा भी किया गया। इन योजनाओं ने जनता के बीच उनकी पकड़ मजबूत की।
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तीसरे विकल्प की राजनीति
विजय ने चुनाव से पहले ही साफ कर दिया था कि वह किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया और सीधे मुकाबले की रणनीति अपनाई। यही रणनीति उन्हें अलग पहचान दिलाने में सफल रही। उनके भाषणों में भावनात्मक अपील भी साफ नजर आई, जिसमें उन्होंने लोगों से अपने परिवार के सदस्य की तरह समर्थन मांगा।
फिल्मी सितारों की परंपरा को नई दिशा
तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों की पुरानी परंपरा रही है। एमजी रामचंद्रन और जयललिता जैसे नेता इसी पृष्ठभूमि से आए थे। विजय ने इस परंपरा को नए दौर में आगे बढ़ाने की कोशिश की है। उनकी एंट्री ने राज्य की राजनीति में नई ऊर्जा और नई बहस को जन्म दिया है।