तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार ने राज्य की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार की योजना बिजली से जुड़ी पुरानी परेशानियों को कम करने और लोगों तक बिना रुकावट बिजली पहुंचाने की है। इसके लिए बिजली कंपनी ने 15 हजार 312 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी की है। इस पैसे से बिजली पहुंचाने वाले पूरे ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
352 बिजली केंद्रों पर होगा काम
सरकार की योजना के तहत पहले से बन रहे 121 बिजली केंद्रों का काम पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही 231 नए बिजली केंद्र बनाए जाएंगे। पुराने बिजली के तार और बिजली पहुंचाने वाले दूसरे साधनों को भी बेहतर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बिजली जाने की परेशानी कम होगी और शहरों के साथ गांवों में भी बिजली व्यवस्था मजबूत हो सकेगी।
पुरानी व्यवस्था बदलने पर 8318 करोड़ खर्च
तमिलनाडु में पुराने बिजली ढांचे को बदलने के लिए 8 हजार 318 करोड़ रुपये अलग से खर्च किए जाएंगे। पुराने बिजली के तार और दूसरी खराब हो चुकी व्यवस्था को सुधारा जाएगा। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलने की उम्मीद है। सरकार चाहती है कि ज्यादा बिजली की जरूरत वाले समय में भी लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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बिजली बचाकर जरूरत के समय होगी इस्तेमाल
सरकार अब ऐसी व्यवस्था पर काम करेगी जिसमें बिजली को जमा करके रखा जा सके। जब बिजली की जरूरत ज्यादा होगी तब जमा बिजली का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए नई तकनीक पर काम होगा। तमिलनाडु सरकार ने आईआईटी मद्रास के साथ भी समझौता किया है ताकि बिजली से जुड़ी नई तकनीक तैयार की जा सके और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से व्यवस्था बनाई जाए।
हर महीने 215 करोड़ बचाने की तैयारी
सरकार अब महंगी बिजली खरीदने पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है। अभी बाजार से खरीदी जाने वाली बिजली की औसत कीमत 8 रुपये 91 पैसे प्रति यूनिट बताई गई है। सरकार लंबे समय के समझौते के जरिए 6 रुपये 63 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने की तैयारी में है। इससे गर्मियों में हर महीने करीब 215 करोड़ रुपये बचने का अनुमान है।
साफ बिजली पर बढ़ेगा तमिलनाडु का जोर
आने वाले पांच साल में तमिलनाडु सूरज और हवा से बनने वाली बिजली पर ज्यादा काम करेगा। बिजली जमा करने की व्यवस्था और हरित हाइड्रोजन से जुड़ी योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार निजी कंपनियों और नई तकनीक के साथ मिलकर काम करने की तैयारी में है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का यह दांव तमिलनाडु की बिजली की परेशानी को कितना कम कर पाता है।