तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने वह कर दिखाया है, जिसकी चर्चा लंबे समय से हो रही थी। अपनी नई पार्टी के साथ विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर उन्होंने साबित कर दिया कि उनका असर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। चुनावी नतीजे आते ही पूरे राज्य में जश्न का माहौल बन गया और हर तरफ ‘थलापति’ के नारे गूंजने लगे। अब वे जल्द ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होता दिख रहा है।
‘थलापति’ नाम की ताकत और पहचान
दक्षिण भारतीय सिनेमा में फैंस अपने पसंदीदा सितारों को खास नाम देते हैं। रजनीकांत को ‘थलाइवा’ और कमल हासन को ‘उलगनायगन’ कहा जाता है। उसी परंपरा में विजय को ‘थलापति’ यानी सेनापति का खिताब मिला। उनके करियर की शुरुआत 1994 में फिल्म ‘रसिगन’ से हुई थी, जिसके बाद उन्हें ‘इलायथलपति’ कहा गया। लेकिन 2017 में फिल्म ‘मर्सल’ के बाद यह नाम छोटा होकर सिर्फ ‘थलापति’ रह गया। आज यही नाम उनकी पहचान बन चुका है, जो राजनीति में भी उनके प्रभाव को मजबूत करता है।
असल नाम, परिवार और जड़ें
विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ, जहां उनके पिता एसए चंद्रशेखर जाने-माने निर्देशक रहे हैं और उनकी मां शोभा चंद्रशेखर एक प्रसिद्ध गायिका हैं। विजय का जीवन हमेशा से परिवार और संस्कारों से जुड़ा रहा है। उन्होंने संगीता से विवाह किया, जो हिंदू परंपराओं के अनुसार हुआ। उनका यह संतुलित निजी जीवन उनकी छवि को और मजबूत बनाता है, जिससे जनता के बीच उनका भरोसा बढ़ा है।
निजी विवादों के बीच मजबूत छवि
राजनीति में कदम रखते ही विजय का निजी जीवन भी चर्चा में आ गया। उनकी शादी और निजी रिश्तों को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं, जिनमें अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ जुड़ाव की चर्चाएं भी शामिल रहीं। हालांकि इन सभी मुद्दों पर विजय ने कभी खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने हमेशा अपने काम और लक्ष्य पर फोकस रखा, जिससे उनकी छवि पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
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जननायक बनने की ओर बढ़ता कदम
अब विजय का यह सफर सिर्फ एक अभिनेता का नहीं बल्कि एक जननेता का बन चुका है। फिल्मों में निभाए गए उनके दमदार किरदार अब असल जिंदगी में नेतृत्व की जिम्मेदारी में बदलते दिख रहे हैं। जनता का भरोसा और समर्थन उन्हें एक नई पहचान दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘थलापति’ राजनीति के मैदान में भी वही कमाल दिखा पाते हैं या नहीं, जो उन्होंने सिनेमा में किया है।