Tanmaxxing Skin Damage : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया ब्यूटी ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे ‘टैनमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। इसमें लोग जानबूझकर लंबे समय तक धूप में रहकर त्वचा को ज्यादा से ज्यादा टैन यानी सांवला करने की कोशिश कर रहे हैं। कई सोशल मीडिया पोस्ट में तेज धूप, ज्यादा यूवी इंडेक्स और कम या बिना सनस्क्रीन के टैनिंग को आकर्षक लुक से जोड़ा जा रहा है। लेकिन त्वचा विशेषज्ञ इस ट्रेंड को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
क्या है टैनमैक्सिंग?
टैनमैक्सिंग दरअसल सोशल मीडिया के ‘लुक्समैक्सिंग’ ट्रेंड से जुड़ा शब्द है। इसका मतलब है अपनी त्वचा को ज्यादा गहरा और ब्रॉन्ज लुक देने के लिए जानबूझकर अधिक धूप लेना। कुछ पोस्ट में लोग तेज यूवी किरणों वाले समय में बाहर रहने, टैनिंग बेड का इस्तेमाल करने या सनस्क्रीन से दूरी बनाने तक की सलाह देते नजर आते हैं।
टैन को स्वस्थ त्वचा समझना है बड़ी भूल
ब्रॉन्ज या सन-किस्ड त्वचा भले ही सोशल मीडिया पर खूबसूरत नजर आए, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक टैन वास्तव में त्वचा की यूवी क्षति के प्रति प्रतिक्रिया है। जब त्वचा पर पराबैंगनी किरणों का असर होता है तो शरीर अधिक मेलेनिन बनाता है, जिससे त्वचा का रंग गहरा दिखाई देने लगता है। यानी टैन होना इस बात का संकेत हो सकता है कि त्वचा को नुकसान पहुंचा है।
समय से पहले बूढ़ी दिख सकती है त्वचा
बार-बार बिना सुरक्षा के धूप में रहने से त्वचा में समय से पहले झुर्रियां, बारीक रेखाएं और पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक अत्यधिक यूवी एक्सपोजर त्वचा कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ ‘सुरक्षित टैन’ जैसी धारणा को सही नहीं मानते।
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ट्रेंड के बजाय अपनाएं सुरक्षित तरीका
अगर आपको ब्रॉन्ज या ग्लोइंग लुक पसंद है तो जानबूझकर ज्यादा धूप लेने के बजाय सुरक्षित कॉस्मेटिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। बाहर निकलते समय सनस्क्रीन, सुरक्षात्मक कपड़े, टोपी और छांव का इस्तेमाल करना त्वचा को अनावश्यक यूवी एक्सपोजर से बचाने में मदद करता है। खासतौर पर तेज यूवी इंडेक्स वाले समय में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। ट्रेंड कुछ समय के लिए खूबसूरत दिखा सकता है, लेकिन त्वचा की सेहत का असर लंबे समय तक रह सकता है। इसलिए ‘टैनमैक्सिंग’ को फैशन स्टेटमेंट बनाने से पहले उसके पीछे छिपे त्वचा संबंधी जोखिमों को समझना जरूरी है।