सदियों से शास्त्रीय संगीत की परंपरा को संजोए ग्वालियर की धरती एक बार फिर सुरों की साधना का साक्षी बनने जा रही है। 101वां तानसेन संगीत समारोह आज से शुरू होकर पांच दिनों तक संगीत प्रेमियों को राग, ताल और लय की अद्भुत दुनिया में ले जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस ऐतिहासिक आयोजन का शुभारंभ करेंगे, जिसमें देश-विदेश के दिग्गज कलाकार स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
तानसेन समाधि पर सजेगा सुरों का दरबार
हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर आयोजित होने वाला यह समारोह शास्त्रीय संगीत का सबसे प्रतिष्ठित मंच माना जाता है। यहां हर वर्ष सुर सम्राट मियां तानसेन की स्मृति में कलाकार अपनी कला के माध्यम से नमन करते हैं। इस वर्ष 101वां आयोजन होने के कारण समारोह का महत्व और भी बढ़ गया है।
शून्य मंदिर की तर्ज पर तैयार भव्य मंच
इस बार संगीत प्रेमियों को केवल कानों से नहीं, आंखों से भी एक अनोखा अनुभव मिलने वाला है। समारोह का मंच ग्वालियर के प्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर, जिसे शून्य मंदिर भी कहा जाता है, की स्थापत्य शैली से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। यह मंच पारंपरिक कला और आधुनिक प्रस्तुति का सुंदर संगम पेश करेगा।
पांच दिनों तक देश-विदेश के दिग्गज कलाकार
15 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय समारोह में भारत सहित विदेशों से आए शास्त्रीय संगीत के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। गायन, वादन और विभिन्न शास्त्रीय विधाओं की प्रस्तुतियां हर शाम संगीत साधकों के लिए यादगार बनेंगी।
पहले दिन सम्मान समारोह का विशेष आयोजन
समारोह के पहले दिन शाम 6 बजे से राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किए जाएंगे। वर्ष 2024 के लिए पंडित राजा काले और वर्ष 2025 के लिए पंडित तरुण भट्टाचार्य को तानसेन अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। वहीं संगीत साधना के क्षेत्र में योगदान के लिए साधना परमार्थिक संस्थान समिति मंडलेश्वर और रागायन संगीत समिति ग्वालियर को राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किया जाएगा।
संगीत प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव
101वां तानसेन संगीत समारोह न केवल शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी भारतीय संगीत विरासत से जोड़ने का काम करेगा। सुरों की यह साधना ग्वालियर को एक बार फिर विश्व संगीत मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाएगी।