बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। दो दशक बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है और पार्टी अध्यक्ष Tarique Rahman आज शाम 4 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। वे देश के सबसे युवा पुरुष प्रधानमंत्री बनेंगे। शपथ ग्रहण समारोह ढाका में आयोजित होगा, जहां कई विदेशी मेहमान भी मौजूद रहेंगे।
संसदीय दल के नेता चुने गए रहमान
BNP की संसदीय बैठक में तारिक रहमान को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11:30 बजे हुई बैठक में पार्टी सांसदों ने उनके नाम पर मुहर लगाई। इसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हुई। 298 निर्वाचित सांसदों ने शपथ ली, जबकि पार्टी ने संवैधानिक सुधार परिषद की सदस्यता को लेकर अलग रुख अपनाया है।
संवैधानिक सुधार परिषद पर विवाद
BNP सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे। उनका तर्क है कि इस विषय पर कोई भी निर्णय राष्ट्रीय संसद में विधिवत पारित होने के बाद ही लिया जाएगा। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने संकेत दिया है कि यदि BNP सांसद परिषद की शपथ नहीं लेते, तो उनके सांसद भी ऐसा नहीं करेंगे। इससे शुरुआती दौर में राजनीतिक तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।
यूनुस का इस्तीफा, सत्ता हस्तांतरण पूरा
अंतरिम नेता Muhammad Yunus ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया और नई निर्वाचित सरकार को सत्ता सौंप दी। उन्होंने लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों की निरंतरता पर जोर दिया। उनके कार्यकाल के अंतिम दिन राष्ट्रीय चार्टर से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी हुए, जिसमें कुछ शर्तें जोड़ी गईं।
ढाका-17 सीट रखी, उपचुनाव की तैयारी
तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट अपने पास रखने और बोगरा-6 सीट खाली करने का निर्णय लिया है। अब निर्वाचन आयोग को 90 दिनों के भीतर बोगरा-6 में उपचुनाव कराना होगा। शेरपुर-3 सीट पर भी मतदान होगा। नई सरकार में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की भी चर्चा है, जहां एक हिंदू सांसद को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
शपथ समारोह में अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी
शाम 4 बजे राष्ट्रपति Mohammad Shahabuddin तारिक रहमान और उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। समारोह में लगभग 1200 मेहमान आमंत्रित हैं। भारत की ओर से Om Birla भी शामिल होंगे। यह कार्यक्रम ढाका के राष्ट्रीय संसद परिसर में आयोजित होगा और इसे बांग्लादेश की नई राजनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।