टाटा स्टील के लिए विदेश से एक बड़ी कानूनी चुनौती सामने आई है। नीदरलैंड्स की एक NGO ने कंपनी की डच यूनिट के खिलाफ करीब 1.6 अरब डॉलर यानी लगभग 13,000 करोड़ रुपये का मुकदमा दायर किया है। यह केस स्टिचिंग फ्रिस विंड नाम की संस्था ने नीदरलैंड्स की जिला अदालत में दाखिल किया है। टाटा स्टील ने इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी है। NGO ने कंपनी की दो सहायक इकाइयों को इस मुकदमे में पक्षकार बनाया है और भारी भरकम मुआवजे की मांग की है।
क्या हैं NGO के आरोप
NGO का आरोप है कि टाटा स्टील के IJmuiden प्लांट से निकलने वाले जहरीले और हानिकारक तत्वों से आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ा है। संस्था का कहना है कि लंबे समय से हो रहे प्रदूषण की वजह से स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा NGO ने यह भी दावा किया है कि प्रदूषण के कारण उस इलाके में घरों की कीमतें आसपास के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम हो गई हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
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टाटा स्टील ने आरोप खारिज किए
टाटा स्टील ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और कल्पनात्मक बताया है। कंपनी का कहना है कि NGO ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। टाटा स्टील का तर्क है कि वह पर्यावरण नियमों का पालन करती है और इस मामले में उसके पास मजबूत कानूनी आधार हैं। कंपनी ने साफ किया है कि वह इस मुकदमे का पूरी मजबूती से सामना करेगी और अदालत में अपना पक्ष रखेगी।
ग्रीन स्टील और कंपनी की तैयारी
टाटा स्टील ने यह भी बताया है कि वह उत्सर्जन कम करने के लिए लगातार निवेश कर रही है। कंपनी अपने ग्रीन स्टील प्लान के तहत डच सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। इसी साल कंपनी ने डीकार्बोनाइजेशन और हेल्थ से जुड़े करीब 7 अरब डॉलर के एक बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत भी की है। टाटा स्टील का कहना है कि वह पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लेती है और इस कानूनी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।