तत्काल टिकट बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाने के लिए रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब एक ट्रेन में पायलट प्रोजेक्ट के तहत काउंटर से तत्काल टिकट बुक करने पर यात्री को अपने मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करना होगा। यह व्यवस्था देश में पहली बार लागू हुई है और इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई है। रेलवे का दावा है कि इससे दलालों के जरिए होने वाली भारी बुकिंग पर अंकुश लगेगा।
ओटीपी सिस्टम की शुरुआत
मध्यप्रदेश से चलने वाली एक प्रमुख शताब्दी ट्रेन में तत्काल टिकट जारी करने की नई ओटीपी प्रणाली लागू कर दी गई है। इस व्यवस्था के तहत अब टिकट तभी कन्फर्म होगा, जब यात्री दिए गए मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को काउंटर पर दर्ज करेगा।
एजेंटों की धांधली पर रोक
रेलवे के अनुसार तत्काल टिकटों में लंबे समय से एजेंटों की सक्रियता देखी जा रही थी। सेकंड्स में बड़ी संख्या में टिकट बुक हो जाने से आम यात्री परेशान होते थे। ओटीपी आधारित सिस्टम से अब एक मोबाइल नंबर से टिकट सत्यापित होगा और फर्जी बुकिंग की संभावना कम हो जाएगी।
30% सीटें नई व्यवस्था के तहत
इस शताब्दी ट्रेन में कुल सीटों का 30 प्रतिशत हिस्सा तत्काल कोटे के लिए सुरक्षित है। लगभग 450 टिकट रोजाना ओटीपी सिस्टम से बुक होंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे टिकट असल में जरूरतमंद यात्रियों तक पहुंच सकेंगे।
बुकिंग प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी
ओटीपी अनिवार्य होने से तत्काल बुकिंग की प्रक्रिया तकनीकी रूप से और मजबूत मानी जा रही है। हर टिकट का मोबाइल नंबर से लिंक होना पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और रेलवे नेटवर्क पर लोड भी कम होगा।
सफल रही तो अन्य ट्रेनों में भी शुरू होगा सिस्टम
यह व्यवस्था फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट है। अगर यह सिस्टम सफल और प्रभावी रहा, तो आने वाले समय में देश की अन्य ट्रेनों में भी ओटीपी आधारित तत्काल टिकट बुकिंग लागू की जा सकती है।