Taxation Amendment Bill : केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 'द टैक्सेशन एंड अदर लॉज संशोधन बिल, 2026' लोकसभा में पेश किया है। प्रस्तावित बदलावों का फोकस विदेशी पूंजी आकर्षित करने, मेक इन इंडिया को मजबूती देने और कारोबार से जुड़े टैक्स नियमों को आसान बनाने पर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, डायमंड ट्रेड, फंड मैनेजमेंट और बिजनेस ट्रस्ट जैसे क्षेत्रों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स को बड़ी राहत
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों को बड़ी टैक्स राहत देने का प्रस्ताव है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों के लिए कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में कंपोनेंट रखने वाली विदेशी कंपनियों पर लागू 2 प्रतिशत प्रेजम्प्टिव टैक्स व्यवस्था को हटाकर लंबी अवधि की टैक्स छूट देने की बात कही गई है। इसके अलावा भारतीय निर्माताओं को मशीनरी और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स छूट की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 15 साल यानी वित्त वर्ष 2040-41 तक करने का प्रस्ताव है।
निवेशकों को टैक्स राहत
रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) जैसे बिजनेस ट्रस्ट में पैसा लगाने वाले यूनिट होल्डर्स को भी राहत देने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था में कुछ परिस्थितियों में निवेशकों को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट बहाल करने की बात कही गई है। राजस्व पर पड़ने वाले असर की भरपाई SPV स्तर पर अतिरिक्त टैक्स व्यवस्था के जरिए करने का प्रस्ताव है, जिससे छोटे निवेशकों पर सीधे अतिरिक्त बोझ को कम किया जा सके।
ये भी पढे़ं : Assam में बाढ़ का Railway पर बड़ा असर, 11 ट्रेनें रद्द और 8 के बदले रूट
डेटा सेंटर को बढ़ावा
भारत में बड़े 'AI Data Cities' और डेटा सेंटर विकसित करने के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान करने पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत विदेशी क्लाउड कंपनियों और भारतीय डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं को कम किया जाएगा। भारतीय कंपनियों को लीज पर ली गई जमीन या इमारत में भी डेटा सेंटर संचालित करने की सुविधा मिलने से शुरुआती पूंजीगत खर्च कम हो सकता है।
डायमंड और फंड सेक्टर
मुंबई और सूरत के स्पेशल नोटिफाइड जोन्स में रफ डायमंड की प्रदर्शनी के साथ खरीद-बिक्री गतिविधियों को भी लंबी अवधि की टैक्स राहत के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इसका लाभ विदेशी माइनिंग कंपनियों के अलावा ब्रोकर्स, साइटहोल्डर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन हाउस तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं विदेशी निवेश फंडों के प्रबंधन से जुड़े नियमों को आसान करने का लक्ष्य भी रखा गया है, ताकि भारतीय फंड मैनेजर्स देश से ही वैश्विक फंडों का संचालन कर सकें। सरकार को उम्मीद है कि इन बदलावों से GIFT City समेत भारत के वित्तीय केंद्रों में निवेश और कारोबार को नई गति मिलेगी।