भारत में जब भी कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की कार खरीदता है, तो उस पर TCS यानी Tax Collected at Source काट लिया जाता है। बहुत लोग समझते हैं कि यह सरकार की कमाई है, जबकि सच्चाई बिल्कुल उलट है। यह आपका ही पैसा है जो अस्थायी रूप से सरकार के पास रखा जाता है और जिसे आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम करके वापस पा सकते हैं। TCS का उद्देश्य केवल लेनदेन को रिकॉर्ड करना और टैक्स चोरी को रोकना है, न कि आपका पैसा स्थायी रूप से लेना। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लाखों लोग यह बात जानते ही नहीं और उनका पैसा वैसे ही पड़ा रह जाता है।
Form 27D ही है पैसे वापस पाने की चाबी
कार खरीदते समय सबसे ज्यादा गलती लोग यहां करते हैं कि वे डीलर से Form 27D लेना भूल जाते हैं। यह फॉर्म यह साबित करता है कि आपकी कार पर कितना TCS कटा है। बिना Form 27D के TCS का रिफंड क्लेम कर पाना मुश्किल हो जाता है। खरीदारी के तुरंत बाद यह फॉर्म लेना बेहद जरूरी है। यह आपका आधिकारिक प्रमाण होता है कि आपने एक निर्धारित राशि TCS के रूप में सरकार को जमा कराई है। अगर यह फॉर्म आपके पास नहीं है, तो आगे चलकर रिफंड में परेशानी आ सकती है।
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TCS क्लेम कैसे करें? प्रक्रिया बेहद आसान
जब आप ITR फाइल करते हैं, तो सबसे पहले Form 26AS डाउनलोड करें। इसमें साफ-साफ लिखा होता है कि आपकी कार पर कितना TCS जमा हुआ है। अब उसी राशि को अपने ITR फॉर्म में शामिल करें। जैसे ही आपकी रिटर्न प्रोसेस होती है, सरकार वही पैसा सीधे आपके बैंक खाते में वापस भेज देती है। यह बिल्कुल आसान प्रक्रिया है, लेकिन लोग जागरूकता की कमी के कारण इसे क्लेम नहीं करते और हजारों रुपये छोड़ देते हैं। वक्त पर क्लेम करने पर रिफंड जल्दी अकाउंट में पहुंच जाता है।
क्यों जरूरी है इस पैसे को वापस लेना?
अधिकतर लोग सोचते हैं कि कार खरीद ली तो बात खत्म, मगर असल में सरकार हर खरीदार को उसका TCS वापस देने को तैयार रहती है। पर लोग यह जान ही नहीं पाते कि यह उनका हक है। सही दस्तावेज जैसे Form 27D, Form 26AS और समय पर ITR फाइलिंग सुनिश्चित करने से आसानी से आपका पैसा वापस मिल जाता है। अगर आप 10 लाख या उससे ज्यादा कीमत की कार खरीदने जा रहे हैं, तो ध्यान रखें TCS आपका ही पैसा है और इसे वापस लेना आपके बजट के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।