Teacher Attendance App:मध्य प्रदेश में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू किया गया मोबाइल एप अब विवादों के घेरे में है। एप को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि उनका दावा है कि यह एप पाकिस्तानी, चीनी और बांग्लादेशी इंजीनियरों की टीम ने मिलकर बनाया है। इससे सिर्फ लाखों शिक्षकों की निजी जानकारी खतरे में नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। शिक्षकों ने इस मामले को लेकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विदेशी हाथों में डेटा की चाबी!
शिक्षकों के आरोपों के अनुसार, जिस एप से वे प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं, उसकी टेक्निकल टीम में पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के इंजीनियर शामिल हैं। इस टीम में पाकिस्तान मूल के डायरेक्टर ऑफ इंजीनियरिंग, बांग्लादेशी सॉफ्टवेयर इंजीनियर और चीनी टेक्नोलॉजी अफसरों के नाम सामने आ रहे हैं। एप में शिक्षकों की संवेदनशील जानकारियां जैसे नाम, जन्मतिथि, समग्र आईडी, बैंक डिटेल्स और फेस डेटा दर्ज हो रही है, जिससे डाटा लीक का सीधा खतरा बताया जा रहा है।
"Uni Corpus" और थर्ड पार्टी कनेक्शन
शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एप बनाने का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा गया था, जिसने फिर एक थर्ड पार्टी को जोड़ा, जिसके विदेशी लिंक सामने आए हैं। इस पूरे सिस्टम में न तो पारदर्शिता रही और न ही शिक्षकों की सहमति ली गई। एप जबरन थोपे जाने से खासकर अतिथि शिक्षक सबसे अधिक नाराज हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
अतिथि शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस ऐप के माध्यम से डाटा विदेशों में गया, तो यह सिर्फ एक डाटा लीक नहीं बल्कि देश की सुरक्षा पर भी सीधा हमला होगा। शिक्षकों ने राज्य के सभी जनप्रतिनिधियों से इस मामले को गंभीरता से लेने और मुख्यमंत्री तक बात पहुंचाने की अपील की है।
सरकारी चुप्पी पर बढ़ी चिंता
इस मामले पर फिलहाल शिक्षा विभाग या संचालनालय की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप्स, सोशल मीडिया और जिलों के संगठनों में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश साफ देखा जा सकता है। विरोध की आवाज़ें अब हर जिले से उठने लगी हैं और यह मामला राज्यव्यापी आंदोलन की शक्ल ले सकता है।