मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की परेशानी इन दिनों चरम पर है। सरकार ने 1 जुलाई से ई-अटेंडेंस सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन तकनीकी खामियों ने शिक्षकों को मुश्किल में डाल दिया है। पोर्टल ठप है, नेटवर्क नहीं मिल रहा, और ऐप लॉगिन नहीं हो पा रहा। दूरदराज के गांवों में तैनात शिक्षक अब पेड़ और छत पर चढ़कर मोबाइल नेटवर्क पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि समय पर हाजिरी लग सके। हाजिरी न लगने की स्थिति में वेतन कटौती का डर और विभागीय कार्यवाही की चिंता भी सता रही है। इस तकनीकी लापरवाही का असर सीधा बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। शिक्षक कक्षा लेने की बजाय नेटवर्क ढूंढने में लग जाते हैं, जिससे शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है। सिस्टम लागू करने से पहले ज़मीनी हालात पर ध्यान न देना अब पूरे शिक्षा तंत्र पर भारी पड़ रहा है।
नेटवर्क नहीं, हाजिरी नहीं!
प्रदेशभर के शिक्षक इन दिनों ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम के कारण परेशान हैं। 1 जुलाई से अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस के लिए पोर्टल ही ठप है। जिले के 1039 सरकारी स्कूलों के करीब 3839 शिक्षक दो दिन से हाजिरी नहीं लगा पाए हैं।
पेड़ों और छतों पर चढ़कर फोटो भेज रहे शिक्षक
दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की समस्या इतनी गंभीर है कि शिक्षक छत या पेड़ पर चढ़कर मोबाइल सिग्नल पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। फोटो खींचकर अधिकारियों को भेजनी पड़ रही है ताकि सैलरी न कटे।
कक्षाओं की बजाय नेटवर्क ढूंढने में व्यस्त शिक्षक
स्कूल पहुंचते ही पहले बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन अब शिक्षक नेटवर्क की तलाश में लग जाते हैं। ऐप लॉगिन नहीं होने से कक्षाओं पर असर पड़ा है। राजधानी समेत कई स्कूलों में यही हाल रहा।
बारिश और बादल भी बने बाधा
फेस रीडिंग और GPS आधारित इस सिस्टम पर मौसम का भी असर पड़ा। बादलों के चलते नेटवर्क और लोकेशन फेल हो गई। बुधवार को सिर्फ 10,471 शिक्षक ही हाजिरी लगा सके, जबकि 3.5 लाख शिक्षक हैं।
सवाल – क्या सभी पर लगेगा वेतन कटौती का नियम?
1 जुलाई से ई-अटेंडेंस अनिवार्य होने के बाद पहले दिन 19 हजार शिक्षकों ने हाजिरी लगाई, जो दूसरे दिन घटकर 10 हजार रह गई। क्या इतनी बड़ी संख्या में वेतन कटेगा? शिक्षक संगठन पहले दिन से इसका विरोध कर रहे हैं।
teacher-attendance-crisis-2025- Government School MP