
muslim castes-तेलंगाना सरकार राज्य में 14 मुस्लिम जातियों को आरक्षण की सुविधा देने की दिशा में अहम कदम उठा रही है। इस फैसले से अनुमानित 3 लाख मुस्लिम परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का यह प्रयास सामाजिक समावेशन और अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में माना जा रहा है। हालांकि जनसंख्या आंकड़ों को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, विशेष रूप से हैदराबाद के पुराने शहर में हुई जनगणना में महिलाओं की भागीदारी को लेकर।
मुस्लिम जातियों को शामिल करने की तैयारी तेज
सरकार जिन 14 मुस्लिम जातियों को आरक्षण के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है, उनमें पसमांदा वर्ग की वे जातियां प्रमुख हैं जो अब तक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े रहे हैं। इस सूची में दर्जी, नाई, कसाई, धोबी, हलवाई जैसी जातियां शामिल हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने के बाद इन्हें ओबीसी सूची में शामिल किया जाएगा।
जनसंख्या आंकड़ों में भी आई गिरावट की आशंका
एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि हैदराबाद के पुराने शहर में रहने वाली कई मुस्लिम महिलाओं ने जनगणना में हिस्सा नहीं लिया। इसके कारण मुस्लिम जनसंख्या में 1 से 2 फीसदी तक की संभावित गिरावट का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति योजनाओं के प्रभाव और लाभार्थियों की पहचान पर असर डाल सकती है।
सामाजिक और राजनीतिक मायने
यह फैसला ना केवल सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी असर डालेगा। आगामी निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले इस कदम को अल्पसंख्यक समुदाय को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही सरकार की यह कोशिश समाज के हाशिये पर खड़े वर्गों को शिक्षा, नौकरी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की भी दिशा में है।