मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के लिए भारत सबसे अहम बाजारों में से एक माना जाता है। कंपनी के सीईओ पहले ही कह चुके हैं कि सरकार के फैसले का असर करीब 15 करोड़ भारतीय यूजर्स पर पड़ रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में Telegram के 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। बड़ी संख्या में छात्र, कारोबारी, कंटेंट क्रिएटर और ऑनलाइन कम्युनिटी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि भारत में किसी भी तरह की रोक Telegram के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
बैन का सबसे बड़ा असर यूजर बेस पर
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी ताकत उसके यूजर्स होते हैं। Telegram पर अस्थायी रोक लगने के बाद कई लोग दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैन की घोषणा के बाद Signal और Viber जैसे ऐप्स के डाउनलोड में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। यदि यूजर्स एक बार दूसरे प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाते हैं तो उन्हें वापस लाना कंपनी के लिए आसान नहीं होता।
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कमाई और कारोबार पर पड़ सकता है असर
Telegram की कमाई का बड़ा हिस्सा उसके बढ़ते यूजर बेस और प्रीमियम सेवाओं पर निर्भर करता है। अगर बैन की अवधि बढ़ती है या भविष्य में कोई और सख्त कदम उठाया जाता है तो कंपनी के लिए अपने यूजर्स को बनाए रखना चुनौती बन सकता है। कम यूजर का मतलब कम प्रीमियम सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन से जुड़ी संभावनाओं पर भी असर पड़ना है। ऐसे में कंपनी की आय प्रभावित हो सकती है।
छवि को भी लग सकता है झटका
सरकार की ओर से लगाए गए आरोप और प्लेटफॉर्म पर लगी रोक Telegram की साख पर भी असर डाल सकती है। कई नए यूजर्स प्लेटफॉर्म से दूरी बना सकते हैं, जबकि मौजूदा यूजर्स का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी कंपनियों के लिए भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े बाजार में पैदा हुई यह स्थिति Telegram के लिए सिर्फ अस्थायी बैन का मामला नहीं, बल्कि उसकी छवि और भविष्य की रणनीति के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है।