इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर लेबनान में अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस तरह से सरकार के साथ एक संयुक्त कूटनीतिक और सैन्य समाधान को आगे बढ़ाने का मौका मिल सके। नेतन्याहू ने कहा कि उत्तरी मोर्चे पर इज़रायल ने “ऐतिहासिक उपलब्धियां” हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि लेबनान की ओर से दो तरह के खतरे थे। एक नजदीकी और दूसरा दूर का।
इज़रायल के शहरों को निशाना बनाना था
नजदीकी खतरे में आतंकियों की घुसपैठ और सीमावर्ती इलाकों पर एंटी-टैंक हमले शामिल थे, जबकि दूर का खतरा हिजबुल्लाह द्वारा वर्षों में तैयार किए गए करीब 1.5 लाख मिसाइल और रॉकेट थे, जिनका लक्ष्य इज़राइल के शहरों को निशाना बनाना था।
दोनों खतरों को काफी हद तक समाप्त कर दिया
नेतन्याहू ने दावा किया कि इज़राइल ने इन दोनों खतरों को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार पूरे उत्तरी सीमा क्षेत्र में एक गहरी सुरक्षा बफर ज़ोन बनाई गई है, जो माउंट हर्मोन, गोलान हाइट्स और यरमूक तक फैली हुई है।
खतरों को पूरी तरह नियंत्रित किया
उन्होंने बताया कि इस बफर ज़ोन के जरिए घुसपैठ और एंटी-टैंक हमलों जैसे नजदीकी खतरों को पूरी तरह नियंत्रित किया गया है और इज़राइली सेना ‘येलो लाइन’ पर तैनात रहकर सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
90 प्रतिशत मिसाइल और रॉकेट भंडार को नष्ट कर दिया
दूर के खतरे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के 90 प्रतिशत मिसाइल और रॉकेट भंडार को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन के शीर्ष नेता हसन नसरल्लाह को मार गिराया गया है और हजारों आतंकियों को खत्म किया गया है। हालांकि उन्होंने माना कि अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और शेष रॉकेट व ड्रोन खतरे से निपटने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।