शुक्रवार अलसुबह सांप के डसने से 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चा रात में बरामदे में माता-पिता के पास सो रहा था। सुबह करीब चार बजे सांप के डसने के बाद वह चिल्लाकर उठा। परिजनों ने बिस्तर पर सांप देखा। आरोप है कि अस्पताल ले जाने से पहले परिजन बच्चे को मवाना, खेड़की और शोभापुर में झाड़फूंक कराने के लिए ले गए। बाद में मेडिकल अस्पताल पहुंचने तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
सांप ने युग की गर्दन पर डसा था
गंगानगर क्षेत्र के अम्हेड़ा गांव निवासी राहुल चालक काम करते हैं। उनके तीन बच्चों में सबसे छोटा 10 वर्षीय युग था। वह रात में बरामदे में बेड पर माता-पिता के साथ सो रहा था। सुबह करीब चार बजे युग अचानक चिल्लाते हुए उठा और पिता को बताया कि उसकी गर्दन में तेज चुभन हो रही है। लाइट जलाने पर बेड पर सांप दिखाई दिया। परिजनों के अनुसार, सांप ने युग की गर्दन पर डसा था।
सांप को डिब्बे में बंद कर दिया
परिजनों ने सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया। युग की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे कार से पहले मवाना, फिर खेड़की और इसके बाद शोभापुर में झाड़फूंक करने वाले व्यक्ति के पास ले गए। वहां से भी उन्हें वापस कर दिया गया। इसके बाद परिजन युग को मेडिकल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन सुबह करीब आठ बजे शव लेकर घर लौट आए।
बच्चे और सांप को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे
10 वर्षीय युग कनिष्का कसेरूबक्सर स्थित ब्राइट लिटिल फ्लावर स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ता था। वह अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसकी मां अंजू गृहणी हैं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीणों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। परिजनों के अनुसार, सुबह किसी ने बताया कि सांप के डसने के बाद 24 घंटे तक इलाज की संभावना रहती है। इसके बाद परिजन फिर बच्चे और सांप को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां भी उपचार से मना कर दिया गया। इसके बाद परिजन दोबारा देसी दवा देने वालों के पास बच्चे को लेकर घूमते रहे और अंत में उसे घर ले आए।