मुजफ्फरनगर। नाबालिग किशोरी का बहला फुसलाकर अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोप सिद्ध होने पर फास्टट्रैक कोर्ट (नंबर दो) के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश कमलापति ने एक अभियुक्त को दस साल की कैद और 40 हजार रुपए का अर्थदंड अदा करने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माने की धनराशि जमा होने पर बीस हजार रुपए पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति देने के आदेश भी दिए हैं।
अभियोजन की ओर से कोर्ट में पैरवी करने वाले सहायक शासकीय अधिवक्ता अरुण शर्मा एवं डीजीसी (फौजदारी) राजीव शर्मा ने बताया कि चरथावल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 18 जून 2010 को चरथावल थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी नाबालिग बेटी का पडौस के मकान में काम कर रहे राजमिस्त्री इन्तजार उर्फ कालू निवासी हरियाखेडा थाना कांधला ने बहला फुसलाकर अपहरण कर लिया।
आरोपी उसे अपने साथ दिल्ली ले गया और उसके साथ एक कमरे में रखकर जबरदस्ती दुष्कर्म किया। उसके बाद आरोपी उसे वापस ट्रेन से लेकर आया और शहर में छोडकर फरार हो गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद 26 जून को किशोरी को बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 15 जुलाई 2010 को आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मामला सेशन सुपुर्द होने के बाद इस मुकदमे की सुनवाई एफटीसी कोर्ट (नंबर 2) के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश कमलापति की कोर्ट में हुई।
कोर्ट में आरोप साबित करने के लिए एडीजीसी अरुण शर्मा ने वादी, पीड़िता, विवेचक, चिकित्सक आदि के बयान कोर्ट में अभियोजन साक्षी के तौर पर दर्ज कराए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश कमला पति ने अभियुक्त इंतजार को अपहरण व दुष्कर्म का आरोपी मानते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास एवं विभिन्न धाराओं में कुल 40 हजार रुपए का अर्थदंड अदा करने की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने आदेश में अर्थदंड की धनराशि में से बीस हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को भी देने के आदेश दिए हैं।