पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मंगलवार को कहा कि स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम हड़ताल जारी है। संगठन ने 23 जुलाई को बेहद महत्वपूर्ण दिन बताते हुए लोगों से बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है।
अधिकारों की मांग करने पर मारा गया
जेएएसी ने लोगों से अपनी मांगों के कार्यान्वयन की मांग को लेकर पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन में शामिल होने और आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया। संगठन ने अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग उन लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने पर मारा गया।
लोगों की दृढ़ता को सलाम करते हैं
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "45 दिनों से जारी उत्पीड़न और क्रूरता, बड़े पैमाने पर हत्याओं और शासकों द्वारा बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन के बावजूद हम कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को सलाम करते हैं। शासक उन लोगों के हत्यारे हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने के बदले में मार दिया गया। दर्जनों लोगों की हत्या की गई, लेकिन शासकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इसका कारण उनकी सत्ता की लालसा है। हम अपने शहीदों के खून से कोई समझौता किए बिना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे इन चालाक और धोखेबाज शासकों के झूठे वादों में न आएं।"
पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन करें
जेएएसी ने मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, "मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोग 23 जुलाई को पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन करें। 23 जुलाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और बंदूक की नोक पर फर्जी चुनावों के जरिए धोखेबाज, चालाक और पाखंडी लोगों को जनता पर थोपने के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा की जाएगी।"
एक अन्य पोस्ट में जेएएसी ने बताया कि रावलकोट निवासी जिब्रान मुश्ताक फराम तारार, जिनका इस्लामाबाद में इलाज चल रहा था, उनकी मौत हो गई। संगठन के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोली लगने से उसकी मौत हुई। यात्रा को 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया।