
मुंबई की राजनीति में ठाकरे ब्रांड को बड़ा झटका लगा है. बेस्ट सोसाइटी चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार 20 साल बाद साथ आए थे लेकिन नतीजे बेहद निराशाजनक रहे. दोनों के संयुक्त पैनल को एक भी सीट नहीं मिली. यानी उनकी राजनीतिक साझेदारी का पहला इम्तिहान पूरी तरह फेल हो गया. इस हार के बाद बीजेपी ने तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ा. मुंबई में जगह-जगह बैनर लगाए गए हैं जिन पर लिखा है, “ठाकरे ब्रांड कोमा में, स्वदेशी देवाभाऊ जोश में.” इन बैनरों पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रसाद लाड, आशीष शेलार, रविंद्र चव्हाण और अन्य बीजेपी नेताओं की तस्वीरें भी लगी हैं.
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चुनाव के नतीजे
बेस्ट पतपेढ़ी चुनाव में शशांक राव पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 21 में से 14 सीटें जीत लीं. महायुति (BJP-शिंदे गुट) का पैनल 7 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रहा. वहीं ठाकरे भाइयों का पैनल शून्य पर सिमट गया. इस नतीजे के साथ ही शिवसेना (उद्धव गुट) का नौ साल पुराना दबदबा पूरी तरह खत्म हो गया.
बेस्ट चुनाव को उद्धव और राज ठाकरे के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. माना जा रहा था कि दोनों गुट साथ आकर मजदूर राजनीति में फिर से पकड़ बनाने की कोशिश करेंगे. लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया कि मतदाताओं ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया.
क्यों जीता शशांक राव पैनल?
विशेषज्ञों का कहना है कि शशांक राव पैनल की जीत उनके वर्षों से मजदूर संगठनों से जुड़े होने और कर्मचारियों की समस्याओं को सीधे उठाने का नतीजा है. उन्होंने आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और BEST कर्मचारियों का भरोसा जीता. यही वजह रही कि 15,000 मतदाताओं ने ठाकरे बंधुओं और महायुति दोनों को दरकिनार कर उनका साथ दिया. इस चुनाव ने साफ कर दिया कि जहां एक तरफ राज और उद्धव की जोड़ी पहले ही टेस्ट में फेल हो गई, वहीं बीजेपी हार के बावजूद राजनीतिक बढ़त लेने में कामयाब रही. बेस्ट चुनाव के ये नतीजे महानगरपालिका चुनावों की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं.