महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले महानगरपालिका चुनाव से पहले राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इसी बीच मुंबई की राजनीति में करीब दो दशक बाद ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी उम्मीद कम ही लोग कर रहे थे। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए एक साथ आने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। दोनों नेताओं ने मुंबई के वर्ली स्थित होटल ब्लू सी में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने गठबंधन की घोषणा की। इस ऐलान के साथ ही साफ हो गया है कि बीएमसी चुनाव अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बनने जा रहा है।
नामांकन से पहले ठाकरे एकजुट
बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं के लिए नामांकन प्रक्रिया 24 दिसंबर से शुरू हो चुकी है, जो 30 दिसंबर तक चलेगी। 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। ऐसे अहम समय पर उद्धव और राज ठाकरे का साथ आना सियासी तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले दोनों नेताओं ने बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि अर्पित की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि ठाकरे परिवार ने महाराष्ट्र के लिए संघर्ष किया है और आज दोनों भाई साथ आए हैं, हमेशा साथ रहने के लिए। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की जनता की लंबे समय से रही भावना बताया।
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मराठी मुद्दे पर सख्त संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे ने साफ कहा कि सीट बंटवारे का खुलासा अभी नहीं किया जाएगा, लेकिन एक बात तय है कि मुंबई का मेयर मराठी ही बनेगा। वहीं उद्धव ठाकरे ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे लोग मुंबई को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों को खत्म कर दिया जाएगा। दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि यह गठबंधन सिर्फ चुनावी गणित नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता और मुंबई की पहचान को लेकर भी सख्त रुख अपनाएगा। इससे मुकाबला और ज्यादा तीखा होने के संकेत मिल रहे हैं।
विरोधियों की प्रतिक्रिया और सियासी मायने
ठाकरे ब्रदर्स के गठबंधन पर सत्तारूढ़ खेमे की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने इसे मजबूरी का गठबंधन बताया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद उद्धव ठाकरे को सहारे की जरूरत है, इसलिए राज ठाकरे का साथ लिया गया है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उद्धव और राज का साथ आना विपक्षी वोटों को एकजुट कर सकता है। बीएमसी चुनाव में यह गठबंधन कितना असर दिखाएगा, यह तो नतीजों से तय होगा, लेकिन इतना साफ है कि ठाकरे ब्रदर्स की वापसी ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।