लंदन की ऐतिहासिक थेम्स नदी के किनारे एक युवक द्वारा पैर धोने का मामूली-सा वीडियो इंटरनेट पर इतना वायरल हुआ कि पूरे ब्रिटेन में बहस छिड़ गई। वीडियो में दक्षिण एशियाई दिखने वाला युवक नदी के ठंडे पानी में अपने पैर डुबोता नजर आ रहा है। घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई और यह सवाल उठने लगा कि क्या यह सिर्फ सामान्य व्यवहार था या पब्लिक स्पेस में असभ्यता मानी जाए। वीडियो देखते ही यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए एक पक्ष ने इसे सांस्कृतिक आदत बताया, जबकि दूसरे ने इसे लंदन की पब्लिक शिष्टाचार के खिलाफ माना।
‘भारतीय’ बताने पर बढ़ा विवाद
वीडियो वायरल होते ही कुछ यूजर्स ने युवक को भारतीय कहकर निशाना साधा, जबकि कई लोग इस दावे पर भड़क उठे। यूजर्स ने लिखा कि कोई सबूत नहीं है कि युवक भारतीय है—दक्षिण एशिया के कई देशों के लोग एक जैसे दिखते हैं। कई कमेंट्स में तो यह भी कहा गया कि अगर यही काम कोई ब्रिटिश या यूरोपियन करता तो शायद किसी को आपत्ति नहीं होती। कई यूजर्स ने पैर धोने को सामान्य बताते हुए कहा कि दुनिया भर में लोग नदियों और समुद्र के किनारे ऐसा करते हैं, इसमें गलत क्या है? इसी दौरान कुछ टिप्पणियों में भारतीयों पर तंज कसा गया, जिससे बहस और भड़क गई।
टेम्स नदी की गंदगी पर उठे सवाल
घटना पर विवाद बढ़ने के बाद चर्चा का फोकस बदलकर टेम्स नदी की वास्तविक हालत पर पहुंच गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नदी में प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है और कई हिस्सों में E.coli बैक्टीरिया की मात्रा 10 गुना तक पाई गई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा पैर धोने पर इतना बवाल क्यों? असली मुद्दा तो टेम्स की गंदगी है। कई लोगों ने नदी को साफ करने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि सीवेज पानी, फैक्ट्री का कचरा और गंदे वाइप्स के ढेर नदी में लगातार जमा हो रहे हैं। हैमरस्मिथ ब्रिज के पास तो ‘वेट वाइप आइलैंड्स’ बन चुके हैं, जो पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हैं।
एक वीडियो ने उठाए बड़े सवाल
इस विवाद के बीच एक और एंगल सामने आया ब्रिटेन में भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ बढ़ते नस्लीय कमेंट्स का। कई भारतीय यूजर्स ने कहा कि यह सिर्फ पैर धोने का मामला नहीं, बल्कि भारतीयों को सामाजिक रूप से नीचा दिखाने की कोशिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया मामूली घटनाओं को सांस्कृतिक टकराव में बदलने का बड़ा कारण बनता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या एक शख्स के पैर धोने से इतनी बड़ी दुनिया हिल जानी चाहिए, या फिर यह समाज की संवेदनशीलता और बढ़ते डिजिटल ट्रोलिंग का एक और उदाहरण है? फिलहाल यह वीडियो केवल वायरल नहीं बल्कि नदी की सफाई, सांस्कृतिक समझ और पब्लिक बिहेवियर पर चर्चा का केंद्र बन चुका है।