केरल की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पार्टी की अहम बैठकों से दूरी, केंद्र सरकार के कुछ कदमों की तारीफ और अब अपने ही संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत पर खुलकर बधाई देना, इन सबने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में थरूर ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया, जिसे राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। इन घटनाओं के बीच स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की बढ़त ने माहौल और गरमा दिया है।
तिरुवनंतपुरम में BJP की बड़ी सेंध
केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में तिरुवनंतपुरम नगर निगम सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। 101 वार्डों वाले इस निगम में भाजपा समर्थित एनडीए ने 50 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। यह वही इलाका है, जहां से शशि थरूर लगातार सांसद चुने जाते रहे हैं और जिसे कांग्रेस तथा वाम दलों का मजबूत गढ़ माना जाता था। भाजपा की इस बढ़त ने 45 साल पुराने वाम मोर्चे के वर्चस्व को तोड़ दिया है। एलडीएफ को 29 और यूडीएफ को 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि दो सीटें निर्दलीयों को मिलीं।
PM मोदी और थरूर, दोनों की प्रतिक्रिया चर्चा में
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए इसे केरल की राजनीति का निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब पारंपरिक विकल्पों से आगे बढ़कर नए रास्ते तलाश रही है। इसी बीच शशि थरूर का बयान भी सुर्खियों में आ गया। थरूर ने भाजपा के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह राजधानी के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव दर्शाता है। उन्होंने मतदाताओं के फैसले का सम्मान करने की बात कही और लोकतंत्र की खूबसूरती बताया।
कांग्रेस में असहजता, अटकलें तेज
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वे हाल के महीनों में केंद्र सरकार की विदेश नीति और कुछ कदमों की सराहना कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष रखने में उनकी भूमिका भी चर्चा में रही है। ऐसे में भाजपा की जीत पर खुलकर बधाई देना कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि थरूर खुद को पार्टी लाइन से ऊपर एक संतुलित नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा इस घटनाक्रम को केरल में अपनी बढ़ती स्वीकार्यता के संकेत के तौर पर देख रही है।