Dengue Fever: डेंगू में अक्सर देखा गया है कि जैसे ही मरीज का तेज बुखार उतर जाता है, लोग राहत की सांस लेते हैं और मान लेते हैं कि अब बीमारी ठीक हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल खतरा यही से शुरू हो सकता है। जी हां दरअसल, बुखार कम होने के बाद भी अगले 24 से 48 घंटे बेहद संवेदनशील होते हैं। इसी दौरान कुछ मरीजों की हालत अचानक बिगड़ सकती है और बीमारी गंभीर डेंगू का रूप ले सकती है।
तीन चरणों से गुजरता है डेंगू
बता दें कि डेंगू मुख्य रूप से तीन चरणों से गुजरता है। इस बीमारी में केवल बुखार का जाना पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं है। हर चरण में शरीर में अलग तरह के बदलाव हो सकते हैं। इसलिए केवल बुखार उतरने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत मानना सही नहीं है।
पहला चरण-तेज बुखार
डेंगू का शुरुआती चरण बुखार वाला होता है। मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद लक्षण उभरते हैं और 2 से 7 दिनों तक रहते हैं। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में ऐंठन, मतली और त्वचा पर लाल निशान देखे जाते हैं। कुछ मरीजों को मसूड़ों में हल्का खून आने की शिकायत भी हो सकती है। इस चरण में मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ देने और उसकी हालत पर नजर रखना जरूरी होता है।
दूसरा चरण- क्रिटिकल फेज
दूसरा चरण बीमारी के तीसरे से सांतवे दिन के बीच आता है। जब बुखार कम हो जात है या उतर जाता है। इसी समय ब्लड वेसल्स से प्लाज्मा का रिसाव हो सकता है, प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और मरीज शॉक में जा सकता है। इसलिए तापमान सामान्य होने के बावजूद मरीज की निगरानी बंद नहीं करनी चाहिए। मरीज को लग सकता है कि अब तबीयत सुधर रही है, लेकिन इसी समय गंभीर लक्षण उभर सकते हैं।
तीसरा चरण- रिकवरी फेज
तीसरे चरण में क्रिटिकल फेज बीतने के बाद छठे या सातवें दिन के आसपास मरीज की हालत में सुधार दिखने लगता है। भूख वापस आती है, कमजोरी कम होती है और प्लेटलेट्स का स्तर सुधरने लगता है। मरीज को पहले की तुलना में बार-बार पेशाब भी आ सकता है. कुछ लोगों में इस दौरान लाल और खुजली वाला रैश दोबारा दिखाई दे सकता है।
यह भी पढ़ें: Neem Leave Benefits: रोज सुबह बासी मुंह खाएं नीम की पत्तियां, दूर भागेंगी ये 5 गंभीर बीमारियां
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर बुखार उतरने के बाद भी मरीज को पेट में तेज दर्द या छूने पर असहनीय दर्द होना गंभीर संकेत हो सकता है। इसके अलावा लगातार उल्टी होना भी चिंता की बात है। नाक या मसूड़ों से खून आना भी गंभीर लक्षणों में शामिल हो सकता है। उल्टी में खून आना या मल का काला और तारकोल जैसा दिखना, सांस लेने में तकलीफ होना और बहुत ज्यादा सुस्ती होना गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
इन लोगों को है ज्यादा खतरा
बता दें कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों, 65 साल से अधिक बुजुर्गों और डायबिटीज, बीपी, किडनी या लिवर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा , जिन्हें दोबारा डेंगू हुआ है, उनमें गंभीर डेंगू का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है।