उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने प्रत्याशी चयन का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी इस बार बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 50 फीसदी मौजूदा विधायकों को दोबारा मैदान में नहीं उतारने की रणनीति पर मंथन चल रहा है। 2022 में यह आंकड़ा करीब 30 फीसदी के आसपास रखने की चर्चा थी। पार्टी का जोर युवाओं, महिलाओं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को ज्यादा अवसर देने पर है।
403 सदस्यीय विधानसभा में 255 विधायक
भाजपा के पास प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में 255 विधायक हैं। ऐसे में आधे टिकट बदलने की स्थिति में करीब 125 से अधिक सीटों पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला सर्वे, संगठनात्मक फीडबैक और केंद्रीय नेतृत्व के मंथन के बाद होगा। पार्टी के लिए सबसे बड़ा पैमाना जीतने की क्षमता रखा गया है। दो या उससे अधिक बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ विधायकों को भी स्थानीय स्तर पर नकारात्मक फीडबैक मिलने पर टिकट की गारंटी नहीं होगी।
चार स्तरों से आकलन की बात सामने आई
भाजपा का फोकस विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक जुटाने पर है। जनस्वीकार्यता, संगठन से तालमेल और क्षेत्र में विधायक की सक्रियता जैसे पहलुओं को परखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में चार स्तरों से आकलन की बात सामने आई है, जिसमें संगठन की रिपोर्ट, सरकार से जुड़ाव, केंद्रीय नेतृत्व का आकलन और संघ का जमीनी फीडबैक शामिल है।
सीटें 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गईं
इस रणनीति के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव का अनुभव भी अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गईं। चुनाव के बाद पार्टी की समीक्षा में उम्मीदवार चयन और स्थानीय स्तर पर फीडबैक की अनदेखी जैसे मुद्दे सामने आए थे। 2024 में भाजपा ने 63 मौजूदा सांसदों में से 16 को टिकट नहीं दिया था। पार्टी अब विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर ज्यादा व्यापक बदलाव के जरिए उस अनुभव से सबक लेने की तैयारी में है।