लखनऊ। 9 फरवरी से विधानमंडल का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है, जो राज्य की आर्थिक योजनाओं का रोडमैप तय करेगा। बजट सत्र के हंगामेदार होने के भी आसार हैं। यह सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब केंद्र से मिलने वाली धनराशि बढ़ी है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो चुकी हैं।
9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा बजट
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश का बजट आकार लगभग 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। दिसंबर 2025 में वित्त विभाग के अनुमानों के अनुसार यह 9.05 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह सकता है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के बजट से करीब एक लाख करोड़ रुपये बड़ा होगा। यह वृद्धि राज्य की बढ़ती राजस्व प्राप्तियों, केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी और विकास योजनाओं पर फोकस के कारण संभव हो रही है। केंद्र के बजट 2026-27 से यूपी को करीब 4.18 से 4.26 लाख करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है, जिसमें केंद्रीय करों में हिस्सेदारी (2.69 लाख करोड़) प्रमुख है, जो पिछले साल से 14 हजार करोड़ अधिक है।
बजट की मुख्य बातें और फोकस वाले विभाग
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, किसान कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और एमएसएमई पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। केंद्र से मिली अतिरिक्त धनराशि का उपयोग एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड रेल (जैसे दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर), शहरी विकास, ग्रामीण सड़कों और लॉजिस्टिक हब पर किया जाएगा। वाराणसी को विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य में पिछले बजट से अधिक आवंटन की संभावना है, साथ ही कर्मचारियों की मांगों (जैसे वेतन वृद्धि, पेंशन) पर भी ध्यान दिया जा सकता है। किसानों के लिए नई योजनाएं और महिला केंद्रित कार्यक्रम भी प्रमुख रहेंगे। कुल मिलाकर, बजट विकास, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर केंद्रित होगा।
हंगामेदार सत्र के प्रबल आसार
यह बजट सत्र राजनीतिक रूप से गरम रहने वाला है। सत्ताधारी बीजेपी इसे विकास और लोक कल्याण की जीत के रूप में पेश करेगी, जबकि विपक्ष (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस आदि) महंगाई, बेरोजगारी, किसान मुद्दों और आरक्षण पर हमला बोलेगा।
लुभावनी घोषणाएं कर सकती है सरकार
2027 चुनाव को देखते हुए सरकार लुभावनी घोषणाएं कर सकती है, जिससे सदन में तीखी बहस और हंगामा संभव है। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बजट पेश करेंगे, जिसके बाद चर्चा और मांगों पर वोटिंग होगी।