केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को मधुमेह की रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत अब मधुमेह महामारी से अछूता नहीं है और इसके लिए समुदाय-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-आधारित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक
रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) के ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल के उद्घाटन और मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी 'विश्वास' के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि मधुमेह और इसकी जटिलताओं के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए रोकथाम, शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक हैं।
70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम
उन्होंने कहा कि भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, इसलिए देश की युवा आबादी के स्वास्थ्य और उत्पादक क्षमता की रक्षा करना 'इंडिया-2047' के विजन के लिए आवश्यक है। डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य सेवा, वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल नवाचार में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ये प्रगति ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचे।
शीघ्र निदान की आवश्यकता है
मंत्री ने कहा कि ग्रामीण भारत अब मधुमेह की महामारी से अछूता नहीं है और इस बीमारी और इसकी जटिलताओं के बोझ को कम करने के लिए शीघ्र निदान, समय पर हस्तक्षेप, जीवनशैली में बदलाव और निरंतर निगरानी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएसडीआई ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे पेशेवर चिकित्सा संगठन विशेषज्ञता को समुदायों के करीब लाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रयासों को पूरक बना सकते हैं।
30 गांवों तक मिली पहुंच
इस पहल के तहत, मधुमेह जागरूकता, स्क्रीनिंग, उपचार और दीर्घकालिक अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक संरचित प्रणाली बनाने हेतु गांवों को गोद लिया जा रहा है। यह कार्यक्रम पहले ही कई राज्यों के लगभग 30 गांवों तक पहुंच चुका है, और आने वाले वर्षों में इसके विस्तार की योजना है। मंत्री ने कहा कि नव-उद्घाटित डिजिटल पोर्टल व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, रोगी देखभाल की निरंतरता, परिणामों की निगरानी और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों के लिए साक्ष्य जुटाने में सक्षम बनाकर सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करेगा।
समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी
उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर की स्वास्थ्य सेवा को वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के साथ जोड़ने से ग्रामीण भारत से वास्तविक डेटा प्राप्त होगा, जिससे शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को रोग के पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने और भारतीय आबादी के लिए उपयुक्त साक्ष्य-आधारित समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, प्रौद्योगिकी भागीदारों, निजी संगठनों और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।