
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जोरदार बहस हुई. सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बोलते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सही वोटरों के नाम भी लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. उनके बाद कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई.
क्या है मुद्दा?
राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है और कई ऐसे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं जो असल में वोट देने के योग्य हैं. उनका कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.
सरकार का जवाब
सरकारी पक्ष से मंत्री विजय चौधरी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम लिस्ट से नहीं हटेगा. उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव चाहती है और सभी योग्य मतदाताओं का नाम सूची में शामिल होगा. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करने दिया जा रहा है.
बुधवार को क्यों हुआ था हंगामा?
बुधवार को तेजस्वी यादव के भाषण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हस्तक्षेप किया था, जिससे सदन में हंगामा हो गया. इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी. दोपहर के सत्र में विपक्ष वॉकआउट कर गया.
विपक्ष की रणनीति
तेजस्वी यादव और विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि अगर गड़बड़ी नहीं रोकी गई, तो वो चुनाव बहिष्कार जैसे कड़े कदम पर भी विचार कर सकते हैं. तेजस्वी ने कहा कि हम जनता की आवाज उठा रहे हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंग.
बता दें कि मतदाता सूची को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है. जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, वहीं सरकार पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात कर रही है. अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और सरकार मिलकर इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं.