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School Safety: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। नेशनल सेफ्टी कोड के अनुसार स्कूलों की सेफ्टी ऑडिट करना जरूरी होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों और छात्रों को आपातकालीन तैयारियों का प्रशिक्षण भी देना अनिवार्य होगा। बता दें कि यह कदम राजस्थान की उस घटना के बाद उठाया गया है, जब एक स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई और कई बच्चे मलबे में दब गए।
स्कूल में सुरक्षा ऑडिट जरूरी
बच्चों और युवाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी स्कूलों और सार्वजनिक सुविधाओं का राष्ट्रीय सुरक्षा संहिताओं और आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार सुरक्षा ऑडिट किया जाना चाहिए। स्कूलों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण जैसे फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंक्लर सिस्टम हैं या नहीं? इसका ऑडिट होना अनिवार्य है।
बिजली की वायरिंग
स्कूल में बिजली की तारें सुरक्षित हैं या नहीं? कहीं खुले तार या खराब वायरिंग तो नहीं, जिससे शॉर्ट सर्किट या आग का खतरा हो? इन सभी चीजों की ऑडिट करना जरूरी है।
The Ministry of Education has issued a directive to all States and Union Territories to take urgent steps to ensure the student safety and well-being. This includes mandatory safety audits of schools and child-related facilities as per national safety codes, training for staff…
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) July 26, 2025
फर्स्ट एड का प्रशिक्षण
कर्मचारियों और छात्रों को आपातकालीन तैयारियों का प्रशिक्षण देना चाहिए। इसमें आग लगने, भूकंप या अन्य हादसों के दौरान क्या करना है, इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। हर स्कूल में कम से कम कुछ कर्मचारियों को फर्स्ट एड का प्रशिक्षण होना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान
आजकल बच्चों के सामने सिर्फ शारीरिक खतरे ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां भी हैं। स्कूल में तनाव या डर का माहौल बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
मजबूत रिपोर्टिंग सिस्टम
अगर स्कूल में कोई हादसा होता है या स्कूल में कोई खतरा नजर आता है, तो उसकी जानकारी 24 घंटे के अंदर संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। अगर कोई स्कूल या कर्मचारी इसमें लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मंत्रालय ने कहा कि इसके लिए एक मजबूत रिपोर्टिंग सिस्टम बनाया जाएगा।
सार्वजनिक रिस्पांसिबिलिटी
माता-पिता और अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए। स्कूलों, सार्वजनिक क्षेत्रों या बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले परिवहन के साधनों में असुरक्षित स्थितियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।