Green Budget Transform Capital: राजधानी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और हरित बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश ग्रीन बजट में 17 विभागों को जिम्मेदारी सौंपते हुए सरकार ने पर्यावरण सुधार को अपनी प्राथमिकता बना दिया है। कुल 1,03,700 करोड़ रुपये के बजट में से 22,236 करोड़ रुपये खास तौर पर हरित योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।
जल बोर्ड सबसे आगे
ग्रीन बजट का सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली जल बोर्ड को मिला है, जिसे 6,485 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उपयोग यमुना की सफाई और जल उपचार परियोजनाओं में किया जाएगा। इसके अलावा परिवहन विभाग को 4,758 करोड़ रुपये देकर ई-बस और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
ऊर्जा पर खास फोकस
लोक निर्माण विभाग को 3,350 करोड़ रुपये धूल नियंत्रण और हरित ढांचे के विकास के लिए दिए गए हैं। वहीं बिजली विभाग को 1,410 करोड़ रुपये सौर और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किए गए हैं। पर्यावरण विभाग को भी प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं के लिए 558 करोड़ रुपये मिले हैं।
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ग्रामीण विकास भी शामिल
सरकार ने ग्रीन एजेंडा को सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रखा है। शिक्षा, पर्यटन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है। वन विभाग को वृक्षारोपण के लिए 181 करोड़, पर्यटन विभाग को 102 करोड़ और शिक्षा विभाग को 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं, ताकि हर स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
अब नीति का हिस्सा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया कि “क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली” अब केवल नारा नहीं, बल्कि नीति बन चुका है। सरकार का लक्ष्य प्रदूषण से लड़ना, जलवायु परिवर्तन से निपटना और राजधानी को टिकाऊ शहर बनाना है। यह ग्रीन बजट दिल्ली के भविष्य को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।