दुल्हन की मांग खुद धोता है दूल्हा! उरांव जनजाति की इस परंपरा को जानकर आप रह जाएंगे हैरान
लोकसत्य
रविवार, 25 मई 2025 • 7:26 pm
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शादी के बाद दूल्हा अपनी दुल्हन की मांग का सिंदूर धो दे... यह सुनकर आप चौंक सकते हैं, लेकिन झारखंड की उरांव जनजाति में यह परंपरा न सिर्फ सामान्य मानी जाती है, बल्कि शुभ भी समझी जाती है। यह रस्में गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश लिए हुए हैं, जो जीवनसाथियों के बीच समता और सहयोग को दर्शाती हैं।
शादी की रात, परंपराओं की शुरुआत
झारखंड की करीब 32 जनजातियों में से उरांव जनजाति की शादियां रात के समय बड़े धूमधाम से होती हैं। विवाह के तुरंत बाद ही खास रीति-रिवाजों की श्रृंखला शुरू हो जाती है। सबसे अनोखी परंपरा अगली सुबह होती है, जब दूल्हा खुद अपनी पत्नी को कुएं पर ले जाकर उसकी मांग का सिंदूर धोता है। यह प्रतीक होता है नई शुरुआत का, जहां दोनों जीवन की जिम्मेदारियों को साथ मिलकर निभाने का वचन देते हैं।
गृहस्थ जीवन का संदेश देती परंपरा
इस समुदाय के लोग "जुआठ" लेकर विवाह की रस्में निभाते हैं, जो कृषि कार्य का उपकरण होता है। इसका भावार्थ होता है कि दंपती मिलकर खेती और जीवन दोनों की जिम्मेदारी साझा करेंगे। इसके अलावा, दूल्हा-दुल्हन सिलवट (मसाला पीसने का पत्थर) पर खड़े होकर अपने रिश्ते की मजबूती का संकल्प लेते हैं।
तीन घड़ों की रस्म और जेठ से छीना-झपटी
दूल्हा कुएं से तीन घड़े पानी भरता है। एक घड़ा दुल्हन अपने सिर पर लेकर चलती है, जबकि बाकी दो घड़े दूल्हा अपने कांधे पर टांगता है। घर पहुंचने पर दुल्हन का जेठ उसके सिर से घड़ा उतारने की कोशिश करता है। इस रस्म में पानी फेंकने की playful लड़ाई होती है, जो परिवार में अपनापन और उत्सव का रंग भरती है।