गोरखपुर चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे ने प्रशासन और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। गोरखपुर में पिछले डेढ़ महीने में चिड़ियाघर में पांच जानवरों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले 30 मार्च को पीलीभीत से लाया गया बाघ मर गया। फिर मादा भेड़िया, बाघिन शक्ति, तेंदुआ मोना और एक पक्षी कॉकाटील भी संक्रमण से जान गंवा चुका है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में जानवरों में फैल रहे बर्ड फ्लू बीमारी को लेकर प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मच गया है। बीते डेढ़ महीने में चिड़ियाघर में अब तक 5 जानवरों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले 30 मार्च को पीलीभीत से लाया गया एक बाघ मरा, उसके बाद मादा भेड़िया, बाघिन ‘शक्ति’, तेंदुआ ‘मोना’ और एक पक्षी कॉकाटील की मौत हो चुकी है। इन सभी की मौत के पीछे संक्रमण को मुख्य कारण माना जा रहा है।
रेस्क्यू के बाद भी खतरे में जानवर
हाल ही में बलरामपुर से रेस्क्यू किए गए दो तेंदुए के शावकों में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस उम्र में मां का दूध न मिल पाना उनकी इम्युनिटी को कमजोर कर देता है। वह आसानी से संक्रमित हो जाते हैं। अस्पताल में मौजूद अन्य जानवरों और पक्षियों से हुए संभावित संपर्क ने इस खतरे को और बढ़ा दिया। रेस्क्यू के बाद इन शावकों को अस्पताल में रखा गया था, जहां पहले ही एक बाघिन की मौत हो चुकी थी। अन्य जानवरों में भी संक्रमण फैल चुका था। 23 मई को आई रिपोर्ट में बाघिन शक्ति, हिमालयन गिद्ध, कॉकाटील और तेंदुए के शावकों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इससे यह साफ होता है कि रेस्क्यू के बाद की व्यवस्था कितनी चुनौतीपूर्ण है।
चिड़ियाघर में पांच जानवरों की मौत से हड़कंप
इन तेंदुए के शावकों को उसी अस्पताल में रखा गया था, जहां पहले बाघिन ‘शक्ति’ की मौत हो चुकी थी और संक्रमण पहले से मौजूद था। डॉक्टरों का मानना है कि अन्य संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से इन शावकों में संक्रमण फैल गया। 23 मई को आई रिपोर्ट में बाघिन, हिमालयन गिद्ध, कॉकाटील और शावकों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी, जिससे यह साफ हो गया कि बर्ड फ्लू का वायरस तेजी से फैल रहा है।
डॉक्टर ने संक्रमण की जताई आशंका
जानवरों की लगातार हो रही मौतों के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने मांसाहारी जानवरों को मिनरल वॉटर देना शुरू किया है, ताकि अगर पानी में संक्रमण हो तो उसे रोका जा सके। लेकिन यह कदम तब उठाया गया जब जानवरों की मौत का सिलसिला शुरू हो चुका था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी कदम उठाए जाते, तो शायद कुछ जानवरों की जान बचाई जा सकती थी।
पर्यटकों की एंट्री पर रोक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिड़ियाघर में पर्यटकों की एंट्री पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा न रहे और जानवरों को भी थोड़ी राहत मिल सके।