लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को बड़ी राहत देते हुए 25 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज 28 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है। ये मामले मुख्य रूप से कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन से जुड़े थे, साथ ही कुछ अन्य छोटे-मोटे अपराध भी शामिल थे।
दाखिल की थीं कुल 72 अर्जियां
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। प्रदेश सरकार ने कुल 72 अर्जियां दाखिल की थीं, जिनमें से 28 मामलों को कोर्ट ने छोटे अपराधों की श्रेणी में रखते हुए वापस लेने की अनुमति प्रदान की। इनमें से ज्यादातर केस कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई स्वास्थ्य और सोशल डिस्टेंसिंग गाइडलाइंस के उल्लंघन से संबंधित थे, जैसे मास्क न पहनना, भीड़ में इकट्ठा होना या अन्य नियम तोड़ना।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां अपराध गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और जनहित में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, उन्हें वापस लेना उचित है। इससे न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक बोझ कम होगा और अदालतों का समय महत्वपूर्ण मामलों के लिए बच सकेगा।
26 फरवरी को होगी गंभीर मामलों की सुनवाई
हालांकि, गंभीर अपराधों से जुड़े शेष मामलों पर अलग से विचार किया जाएगा। इन मामलों की सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने लोक अभियोजक को निर्देश दिए हैं कि मंजूर मामलों में संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में वापसी की प्रक्रिया तुरंत पूरी की जाए।यह फैसला उन 25 जनप्रतिनिधियों (जिनमें विधायक, सांसद या अन्य चुने हुए प्रतिनिधि शामिल हैं) के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन पर महज छोटे उल्लंघनों के कारण लंबे समय से कानूनी कार्रवाई लटकी हुई थी।