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Green Monkey Horse : दुनिया में कई ऐसे जानवर होते हैं जो अपनी खूबसूरती, ताकत या विशेषताओं के कारण लाखों-करोड़ों में बिकते हैं, लेकिन जब बात घोड़ों की हो, तो उनकी कीमत उनकी नस्ल, रफ्तार और खून में दौड़ते चैंपियन डीएनए से तय होती है. ऐसा ही एक नाम है – ग्रीन मंकी (Green Monkey)। यह कोई आम घोड़ा नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे महंगा बिकने वाला घोड़ा है, जिसकी कीमत सुनकर किसी का भी दिमाग चकरा सकता है.
कौन था ग्रीन मंकी?
ग्रीन मंकी एक थॉरौब्रेड (Thoroughbred) नस्ल का रेसिंग घोड़ा था. इसका जन्म साल 2004 में अमेरिका में हुआ था. इसे "Green Desert" और "Magical Masquerade" नामक प्रसिद्ध रेसिंग घोड़ों की संतान माना गया, यानी इसकी नस्ल में चैंपियन बनने का खून पहले से ही दौड़ रहा था.
कितनी थी ग्रीन मंकी की कीमत?
साल 2006 में एक नीलामी के दौरान ग्रीन मंकी को 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी उस समय के हिसाब से करीब 110 करोड़ रुपए में बेचा गया था. यह अब तक किसी भी घोड़े की सबसे ऊंची बिक्री मानी जाती है. इसकी यह कीमत सिर्फ उसकी नस्ल और रफ्तार की क्षमता के आधार पर लगाई गई थी. क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान ग्रीन मंकी ने एक फर्लांग (200 मीटर) की दूरी को सिर्फ 9.8 सेकंड में पूरा किया था, जो एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड था.
नाम 'ग्रीन मंकी' क्यों पड़ा?
इसका नाम सुनकर ऐसा लग सकता है जैसे ये कोई बंदर हो, लेकिन असल में इसका नाम "The Green Monkey" अमेरिकी रेसिंग और प्रजनन परंपरा का हिस्सा है. इसका नाम उसके पूर्वज घोड़े "Green Desert" और कुछ पारिवारिक नामों को मिलाकर रखा गया था.
क्या ग्रीन मंकी ने रेस में जीत हासिल की?
यही इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला पहलू है. ग्रीन मंकी ने रेसिंग की दुनिया में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया. उसने अपने करियर में केवल 3 रेसों में भाग लिया और एक भी नहीं जीती. इतनी बड़ी कीमत चुकाने के बाद जब वह जीत नहीं पाया, तो यह घुड़दौड़ की दुनिया में एक बहुत बड़ा झटका माना गया.
फिर क्यों था इतना महंगा?
इसकी नस्ल और प्रशिक्षण के दौरान दिखाई गई रफ्तार के कारण सभी को उम्मीद थी कि यह भविष्य में बहुत बड़ा चैंपियन बनेगा। यही उम्मीद इसकी कीमत को आसमान तक ले गई. लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह साफ हो गया कि हर तेज़ घोड़ा रेस में चैंपियन नहीं बनता.
ग्रीन मंकी का बाद का जीवन
रेसिंग से जल्दी रिटायर होने के बाद ग्रीन मंकी को Stud Horse यानी प्रजनन के लिए इस्तेमाल किया गया. इसके बच्चे भी कुछ हद तक सफल रहे लेकिन ग्रीन मंकी जैसा कोई दोबारा नहीं बन पाया. वर्ष 2018 में ग्रीन मंकी का निधन हो गया.
ग्रीन मंकी सिर्फ एक घोड़े का नाम नहीं, बल्कि यह उस जुनून, उम्मीद और जोखिम का प्रतीक है जो रेसिंग की दुनिया में अक्सर देखे जाते हैं. यह दिखाता है कि कीमत और प्रदर्शन हमेशा एक जैसे नहीं होते। भले ही ग्रीन मंकी रेस में चैंपियन नहीं बन सका, लेकिन वह आज भी दुनिया के सबसे महंगे घोड़े के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज है.