लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत फ्यूज सरचार्ज बढाकर बिजली महंगी करने के यूपी पावर कारपोरेशन (यूपीपीसीएल) के फैसले पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बिफर पडे हैं। ऊर्जा मंत्री यूपी पीसीएल के चेयरमैन आशीष गोयल को एक कडा पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है- मेरे विभाग के फैसले मुझे टीवी न्यूज चैनल से पता चलते हैं। बिना बताए मुख्यालय से कहां गायब रहते हो?
ऊर्जा मंत्री ने चेयरमैन को लिखे पत्र में सवाल किया है कि जून के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत फ्यूल एण्ड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) लगाने का फैसला बिना उन्हें बताए और बिना उनकी अनुमति के कैसे लिया गया? मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस फैसले से सरकार की छवि खराब हुई है और विभाग की बदनामी हुई है। उन्होंने पूछा कि इतने महत्वपूर्ण फैसले पर मंत्री को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?
मंत्री ने चेयरमैन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए
उन्होंने कहा कि संकट के समय चेयरमैन मुख्यालय से बाहर रहते हैं और विभागीय मामलों में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। मंत्री ने इसे जनहित के खिलाफ और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया। मुझे मेरे ही विभाग के फैसले मीडिया से पता चलते हैं। ये रवैया ठीक नहीं. पत्र में बिजली विभाग में अनुभवी कर्मचारियों को हटाने, नए और कम अनुभवी लोगों को तैनात करने तथा बिजली आपूर्ति व्यवस्था में खामियों पर भी नाराजगी जताई गई है.
10 प्रतिधत ईंधन अधिभार वसूली के मामले में नियामक आयोग सख्त
उधर, इस मामले पर उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई करते हुए विद्युत नियामक आयाेग ने यूपीपीसीएल प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस जारी कर 19 जून तक जवाब मांगा है।विद्युत उपभोक्ताओं से जून के महीने में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने का आदेश जारी हुआ था। इसी आदेश को विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में चुनौती दी थी। चूंकि सुनवाई के दौरान एक सप्ताह तक यूपीपीसीएल ने विद्युत नियामक आयोग को पहले जारी नोटिस का जवाब नहीं दिया इसलिए आयोग ने यह दूसरा नोटिस जारी करके 19 जून तक यूपीपीसीएल से जवाब तलब किया है.